ऑपरेशन सिंदूर – भारतीय वायुसेना की सटीक और योजनाबद्ध कार्रवाई
भारतीय वायुसेना ने हाल ही में पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाते हुए एक विशेष सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसे “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया। यह हमला रणनीतिक रूप से बहुत ही सटीक और योजनाबद्ध ढंग से किया गया था, जिसमें नागरिकों को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुँचाई गई।
इस ऑपरेशन की जानकारी विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी ने साझा की। उन्होंने बताया कि इस मिशन में पाकिस्तान में मौजूद 9 आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया गया और हमला केवल 25 मिनट के अंदर पूरा कर लिया गया। इस हमले में उन्नत और आधुनिक मिसाइल तकनीक का उपयोग किया गया।
इस ऑपरेशन में दो मुख्य मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ: स्काल्प (SCALP) और हैमर (HAMMER)।
- स्काल्प मिसाइल एक लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल है, जिसे हवा से जमीन पर मार करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी मारक क्षमता 250 किलोमीटर से अधिक होती है और यह अपने लक्ष्य को अत्यंत सटीकता के साथ नष्ट करने में सक्षम है। इसका उपयोग उन लक्ष्यों पर किया गया जो दुश्मन की सीमा के काफी अंदर स्थित थे।
- वहीं, हैमर मिसाइल अपेक्षाकृत छोटी दूरी के लक्ष्यों पर सटीक हमले के लिए प्रयोग की जाती है। यह खासकर राफेल लड़ाकू विमानों से छोड़ी जाती है और इसका उपयोग उन ठिकानों पर किया गया जो सीमा के पास स्थित थे।
भारतीय अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि इस हमले में केवल आतंकवादी ठिकानों को ही निशाना बनाया गया, पाकिस्तानी सेना के किसी भी ठिकाने पर हमला नहीं किया गया। साथ ही नागरिकों को कोई नुकसान न पहुँचे, इसका विशेष ध्यान रखा गया।
इस मिशन की योजना में उपग्रह चित्रों, मानवीय खुफिया सूचनाओं (Human Intelligence), और ड्रोन सर्वेक्षण जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि सभी लक्ष्यों की पहचान सटीक रूप से हो और हमला बेहद प्रभावी रहे।
“ऑपरेशन सिंदूर” नाम भारत की सांस्कृतिक और सैन्य भावना को भी दर्शाता है – जहाँ ‘सिंदूर’ एक पवित्र प्रतीक है, वहीं यह साहस और बलिदान का भी प्रतीक बनता है। यह ऑपरेशन भारत की रणनीतिक क्षमता और वैश्विक मंच पर उसकी ज़िम्मेदार भूमिका को उजागर करता है।
इस तरह, ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के विरुद्ध कड़े कदम उठाने में संकोच नहीं करेगा, लेकिन यह कदम नैतिकता, मानवता और अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में रहकर ही उठाए जाएंगे।