ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान के वैश्विक आतंकवादी अड्डे होने का पर्दाफाश
पाकिस्तान लंबे समय से वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बना हुआ है। हाल ही में भारत द्वारा चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर इस तथ्य को ठोस प्रमाणों के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर करता है। यह कार्रवाई उस वीभत्स आतंकी हमले के बाद की गई जिसमें 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की छाया इकाई टीआरएफ (The Resistance Front) ने ली थी।
इस हमले के तुरंत बाद, भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित 21 आतंकी प्रशिक्षण शिविरों पर सटीक सैन्य हमला किया। यह हमला केवल 25 मिनट में पूरा कर लिया गया, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना की संयुक्त कार्रवाई में यह अभियान सफलता पूर्वक अंजाम दिया गया।
इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में पाकिस्तान को उम्मीद थी कि उसे समर्थन मिलेगा, लेकिन इसके उलट, अधिकांश देशों ने पाकिस्तान की भूमिका पर तीखे सवाल उठाए। सभी ने इस बात की निंदा की कि कैसे पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से उसके गहरे संबंध हैं।
संयुक्त राष्ट्र और FATF (वित्तीय कार्रवाई कार्य बल) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं पहले भी पाकिस्तान को चेतावनी देती रही हैं, लेकिन पाकिस्तान बार-बार आतंकी संगठनों का नाम बदलकर उन्हें बचाता रहा है। जमात-उद-दावा पर प्रतिबंध लगने के बाद उसे फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन के रूप में फिर से खड़ा किया गया। फिर उसे भी प्रतिबंधित कर अल्लाह-ओ-अकबर तहरीक के नाम से पुनः सक्रिय किया गया। इसी तरह जैश-ए-मोहम्मद भी अल रहमत ट्रस्ट के नाम पर काम कर रहा है।
मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और अब्दुल रहमान जैसे आतंकियों को सिर्फ दिखावटी सजाएं दी गईं। साजिद मीर के मामले में तो पाकिस्तान ने पहले उसे मरा हुआ बताया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद बाद में उसे जीवित पकड़ना पड़ा।
भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने हाल ही में इन मामलों को उठाकर पाकिस्तान की दोगली नीति को बेनकाब किया है। पिछले 20 वर्षों से लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन बार-बार नाम और चेहरे बदलकर दुनिया को धोखा देते आ रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद मारे गए आतंकियों का पाकिस्तान में राष्ट्रीय ध्वज के साथ अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें सेना और सरकार के उच्च अधिकारी शामिल हुए। यह पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने की नीति को साफ दर्शाता है।
अब, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर गंभीरता से ध्यान दे रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तान को जल्द ही आतंकवाद के लिए उचित अंतरराष्ट्रीय सजा मिलेगी और उसे कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया जाएगा।