तिरुमला में “गोविंदा” नाम 10 लाख बार लिखने वाली युवती को मिला वीआईपी दर्शन

तिरुमला में “गोविंदा” नाम 10 लाख बार लिखने वाली युवती को मिला वीआईपी दर्शन

आंध्र प्रदेश के तिरुमला स्थित विश्वप्रसिद्ध वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में हाल ही में एक अद्भुत और प्रेरणादायक घटना घटी। कर्नाटक राज्य से ताल्लुक रखने वाली एक युवती कीर्तना ने “गोविंदा” नाम को 10,01,116 बार लिखकर अपनी गहरी भक्ति का परिचय दिया। इसके बदले उन्हें तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) की ओर से वीआईपी ब्रेक दर्शन का अवसर प्रदान किया गया। उनके साथ दो अन्य भक्तों को भी यही विशेष सम्मान मिला।

युवाओं में भक्ति की भावना को प्रोत्साहन

करीब दो साल पहले, TTD प्रशासन ने एक विशेष योजना की घोषणा की थी। इस योजना के अंतर्गत, जो भी 25 वर्ष से कम उम्र के भक्त 10 लाख बार “गोविंदा” नाम लिखकर जमा करेंगे, उन्हें वीआईपी ब्रेक दर्शन का सौभाग्य मिलेगा। इस योजना का उद्देश्य युवाओं में आध्यात्मिक चेतना जगाना और सनातन धर्म के प्रति श्रद्धा को बढ़ावा देना था।

कीर्तना ने इस पहल के अंतर्गत “गोविंदा” नाम को एक मिलियन से भी अधिक बार लिखकर अपनी निष्ठा, धैर्य और भक्ति का परिचय दिया। इस सराहनीय प्रयास को मान्यता देते हुए मंदिर प्रशासन ने उन्हें वीआईपी दर्शन का पुरस्कार दिया।

नामस्मरण की महिमा

“गोविंदा” नाम का जप और लेखन केवल एक साधारण धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि यह नामस्मरण की एक महान साधना है। ऐसा माना जाता है कि भगवान का नाम जपने से मन शुद्ध होता है, आत्मा को शांति मिलती है और व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से उन्नति करता है। 10 लाख बार नाम लिखना एक अत्यंत कठिन और अनुशासित साधना है, जिसे कीर्तना जैसे युवा भक्तों ने सिद्ध कर दिखाया है।

प्रेरणादायक पहल

TTD की यह पहल आज के डिजिटल युग में अत्यंत प्रेरणादायक और प्रासंगिक है। जब युवा पीढ़ी आधुनिक जीवनशैली में उलझी हुई है, तब ऐसी योजनाएं उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं। यह घटना न केवल धार्मिक भक्ति का उदाहरण है, बल्कि यह यह भी दर्शाती है कि समर्पण और आस्था से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

निष्कर्ष

कीर्तना जैसी युवा भक्त की यह उपलब्धि यह दिखाती है कि सच्ची भक्ति उम्र की मोहताज नहीं होती। तिरुमला देवस्थानम की इस पहल से युवाओं में नई चेतना का संचार होगा और अधिक लोग अध्यात्म की ओर आकर्षित होंगे। ऐसे प्रयासों से सनातन धर्म और संस्कृति को संरक्षण मिलेगा और आने वाली पीढ़ियाँ भी इस विरासत को आगे बढ़ाएँगी।

गोविंदा गोविंदा!

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