भारत की रक्षा उपकरण निर्यात में 34 गुना वृद्धि – आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि

भारत की रक्षा उपकरण निर्यात में 34 गुना वृद्धि – आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि

भारत की रक्षा क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बयान में कहा कि भारत का रक्षा निर्यात 2013-14 की तुलना में 34 गुना बढ़ गया है। यह वृद्धि केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत संभव हुई है।

निर्यात में वृद्धि के आँकड़े:

रक्षा मंत्री के अनुसार, 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात केवल ₹686 करोड़ था। लेकिन 2024-25 में यह ₹23,622 करोड़ तक पहुँच गया है। यह आँकड़े भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं और वैश्विक बाज़ार में बढ़ती मांग को दर्शाते हैं।

आत्मनिर्भर भारत का प्रभाव:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई ‘आत्मनिर्भर भारत’ योजना का उद्देश्य भारत को एक स्वदेशी रक्षा उत्पादन केंद्र बनाना है। इस पहल के तहत देश में रक्षा उपकरणों का स्थानीय उत्पादन बढ़ाया गया, जिससे न केवल घरेलू ज़रूरतें पूरी हो सकें, बल्कि उन्हें दूसरे देशों को भी निर्यात किया जा सके।

स्वदेशी रक्षा उपकरण और तकनीक:

आज भारत अनेक उन्नत रक्षा उपकरणों का स्वयं निर्माण कर रहा है, जैसे:

  • अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक
  • पिनाका रॉकेट सिस्टम
  • ड्रोन और निगरानी प्रणालियाँ
  • रेडार और संचार उपकरण
  • छोटे हथियार, ग्रेनेड और बुलेटप्रूफ जैकेट्स
  • साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम

इनमें से कई उपकरण अब अन्य देशों को निर्यात किए जा रहे हैं, जो भारत की वैश्विक साख को मजबूत कर रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर भारत की भागीदारी:

आज दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका, खाड़ी देश और कुछ यूरोपीय देशों ने भारत के रक्षा उपकरणों में रुचि दिखाई है। गुणवत्ता, किफायती मूल्य और समय पर आपूर्ति के कारण भारत का रक्षा क्षेत्र प्रतिस्पर्धी बना है।

सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ अब निजी कंपनियाँ भी इस क्षेत्र में सक्रिय हो चुकी हैं। डीआरडीओ, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स, और अनेक निजी स्टार्टअप मिलकर रक्षा क्षेत्र में नए उत्पाद विकसित कर रहे हैं।

रणनीतिक महत्व:

रक्षा उपकरणों में आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने, आयात पर निर्भरता घटाने और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत करने से भी जुड़ा है।

निष्कर्ष:

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा घोषित यह 34 गुना वृद्धि भारत के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह दिखाता है कि भारत अब न केवल अपनी रक्षा ज़रूरतों को पूरा कर सकता है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाज़ार में भी एक भरोसेमंद खिलाड़ी बन चुका है। आने वाले वर्षों में भारत एक वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में और भी ऊँचाइयों को छू सकता है।

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