भारत ने तुर्की की सेलिबी कंपनी की सुरक्षा मंजूरी रद्द की — पाकिस्तान के समर्थन पर सख्त कार्रवाई
भारत सरकार ने तुर्की आधारित सेलिबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया की सुरक्षा मंजूरी को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इस निर्णय का मुख्य कारण तुर्की द्वारा पाकिस्तान को दिया गया खुला समर्थन बताया गया है, जो हाल में भारत के “ऑपरेशन सिंधु” के दौरान सामने आया।
इस ऑपरेशन के दौरान, पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाते हुए 500 से अधिक ड्रोन लॉन्च किए। भारतीय सुरक्षा बलों ने सभी ड्रोन को हवाई क्षेत्र में ही नष्ट कर दिया। जांच के दौरान पता चला कि ये सभी ड्रोन तुर्की की रक्षा कंपनी ‘बायकर डिफेंस’ द्वारा निर्मित थे। इस कंपनी का स्वामित्व सेलचुक बायरक्तार के पास है, जो तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के दामाद हैं।
बायकर डिफेंस की ड्रोन तकनीक और पाकिस्तान के साथ उसके सैन्य सहयोग ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए। इसी के साथ, यह भी सामने आया कि सेलिबी एयरपोर्ट सर्विसेज की मालकिन सुमेये बायरक्तार हैं, जो राष्ट्रपति एर्दोगन की बेटी हैं। हालांकि, सेलिबी इंडिया ने इस संबंध को नकारा है।
तुर्की के पाकिस्तान के पक्ष में खड़े होने के विरोध में भारत में #BoycottTurkey सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। भारतीय पर्यटकों ने तुर्की का बहिष्कार करना शुरू कर दिया, व्यापारियों ने तुर्की से मार्बल आयात बंद करने का निर्णय लिया। कई फिल्म निर्माताओं और विश्वविद्यालयों ने भी तुर्की के साथ अपने करार रद्द कर दिए।
इस पृष्ठभूमि में भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सेलिबी कंपनी की सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी। यह कंपनी पिछले 15 वर्षों से दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि, कन्नूर, गोवा और अहमदाबाद समेत 9 प्रमुख हवाईअड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं दे रही थी। इसमें यात्रियों की सहायता, विमान संचालन, कार्गो लोडिंग/अनलोडिंग और सामान्य विमान सेवाएं शामिल थीं।
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि, “देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और कोई व्यापारिक संबंध उससे ऊपर नहीं हो सकता।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रभावित हवाईअड्डों पर यात्रियों और माल ढुलाई की सेवाएं बाधित नहीं होंगी। मंत्रालय यह सुनिश्चित कर रहा है कि सेलिबी इंडिया के कर्मचारियों को बनाए रखा जाए ताकि सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहें।
यह फैसला भारत की ओर से साफ संदेश है कि जो भी देश या संस्थान भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के विरुद्ध कार्य करेगा, उसे कड़े परिणाम भुगतने होंगे।