अमेरिका में iPhone बना तो बढ़ सकती है क़ीमत ₹3 लाख तक!
iPhone दुनिया का सबसे लोकप्रिय और प्रीमियम स्मार्टफोन है। इसे अमेरिकी कंपनी Apple बनाती है, लेकिन इसका निर्माण मुख्य रूप से चीन और भारत जैसे देशों में होता है, जहां निर्माण लागत कम होती है। भारत में Apple ने चेन्नई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों के पास iPhone निर्माण संयंत्र स्थापित किए हैं, जिससे न केवल उत्पाद की लागत घटती है बल्कि स्थानीय रोज़गार भी बढ़ता है।
हाल ही में ऐसी ख़बरें सामने आईं कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Apple के CEO टिम कुक से आग्रह किया था कि iPhone का निर्माण अमेरिका में किया जाना चाहिए ताकि देश में नौकरियों का सृजन हो सके और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिले। ट्रंप की ‘मेक इन अमेरिका’ नीति के तहत यह विचार सामने आया।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि Apple भारत या चीन जैसे देशों के बजाय अमेरिका में iPhone का निर्माण शुरू करता है, तो इसकी लागत तीन गुना तक बढ़ सकती है। इसका कारण यह है कि अमेरिका में श्रमिकों की मजदूरी अधिक है, फैक्ट्रियों की स्थापना की लागत ज्यादा है, और टैक्स भी ज़्यादा देना होता है। नतीजतन, एक सामान्य iPhone जिसकी भारत में कीमत लगभग ₹1 लाख होती है, वह ₹3 लाख तक जा सकती है।
इससे उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा। भारत जैसे विकासशील देशों में पहले से ही iPhone एक लग्ज़री आइटम माना जाता है। यदि इसकी कीमत ₹3 लाख तक पहुंच जाती है, तो बहुत से लोग इसे खरीदने की स्थिति में नहीं रहेंगे। इससे Apple की बिक्री पर भी असर पड़ सकता है और प्रतिस्पर्धी ब्रांड्स को बढ़त मिल सकती है।
इसके अलावा, भारत में iPhone निर्माण से हज़ारों लोगों को रोज़गार मिला है। यदि उत्पादन अमेरिका स्थानांतरित होता है, तो भारत में रोजगार के अवसर घट सकते हैं, जिससे आर्थिक और सामाजिक प्रभाव भी पड़ेगा।
Apple ने हाल के वर्षों में भारत में अपने उत्पादन का विस्तार किया है और iPhone 15 जैसे मॉडल भारत में बनाए जा रहे हैं। भारत सरकार की “मेक इन इंडिया” नीति ने भी विदेशी कंपनियों को देश में निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया है। ऐसे में यदि Apple भारत से निर्माण हटाता है, तो यह एक बड़ा झटका होगा।
निष्कर्ष:
iPhone की उत्पादन नीति केवल मुनाफे पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाज़ार की मांग, उपभोक्ता की क्षमता और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं पर भी आधारित होनी चाहिए। अगर उत्पादन अमेरिका में होता है और कीमत ₹3 लाख तक पहुंच जाती है, तो यह आम उपभोक्ता की पहुंच से बाहर हो जाएगा। इसलिए Apple को संतुलित रणनीति अपनानी होगी ताकि उत्पाद की गुणवत्ता और कीमत दोनों का संतुलन बना रहे।