भारत द्वारा सिंधु नदी का पानी रोके जाने के बीच पाकिस्तान में चीन ने मोहम्मद डैम निर्माण को तेज किया
भारत और पाकिस्तान के बीच जल-साझेदारी को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। अब भारत ने 1960 में हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित करने का निर्णय लिया है। इसके बाद पाकिस्तान में मोहम्मद डैम के निर्माण कार्य को चीन ने तेजी से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है, ताकि इसे निर्धारित समय के अनुसार 2025 तक पूरा किया जा सके।
सिंधु जल संधि और भारत का रुख
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐतिहासिक समझौता था, जिसे 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में किया गया था। इसके अनुसार, भारत को रावी, ब्यास और सतलुज (पूर्वी नदियाँ) का अधिकार मिला, जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब (पश्चिमी नदियाँ) का जल मिलने का अधिकार प्राप्त हुआ।
हाल के वर्षों में पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देने और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते भारत ने इस संधि को निलंबित करने का निर्णय लिया। भारत ने सिंधु नदी का पानी रोकने की दिशा में कदम उठाते हुए अपने जल संसाधनों पर नियंत्रण की नीति अपनाई है।
मोहम्मद डैम: पाकिस्तान की बड़ी परियोजना
मोहम्मद डैम पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्वात नदी (सिंधु की सहायक नदी) पर बन रहा एक प्रमुख बांध है। यह परियोजना 2001 में प्रस्तावित की गई थी लेकिन कई वर्षों तक वित्तीय और प्रशासनिक कारणों से रुकी रही। अंततः 2019 में प्रधानमंत्री इमरान खान के कार्यकाल में इसका निर्माण शुरू हुआ।
इस डैम के मुख्य लाभ:
- 800 मेगावाट विद्युत उत्पादन
- 12 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई
- बाढ़ नियंत्रण और जल भंडारण क्षमता
- देश की जल सुरक्षा को मजबूत बनाना
चीन की भूमिका
भारत द्वारा सिंधु नदी का जल रोकने की घोषणा के बाद, पाकिस्तान की जल समस्या को गंभीरता से लेते हुए चीन ने इस परियोजना में अपना निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ा दिया है। चीन की कंपनियाँ अब मोहम्मद डैम के निर्माण को तेजी से पूरा करने के लिए काम कर रही हैं। यह सहयोग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक भी है।
बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत चीन पाकिस्तान में कई बड़े बुनियादी ढांचे प्रोजेक्ट्स में पहले से ही शामिल है, और मोहम्मद डैम इसका एक नया उदाहरण बन गया है।
निष्कर्ष
भारत-पाकिस्तान-चीन के बीच जल संसाधनों को लेकर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा अब और तेज हो गई है। भारत द्वारा सिंधु जल पर नियंत्रण बढ़ाना और चीन द्वारा पाकिस्तान में डैम निर्माण को तेज करना दक्षिण एशिया में जल नीति को एक नए भू-राजनीतिक मोर्चे पर ले जा रहा है।