सिंगापुर की नई मंत्रिपरिषद में छह तमिल नेताओं को मिली जगह – तमिल समुदाय के लिए गौरव का क्षण

सिंगापुर की नई मंत्रिपरिषद में छह तमिल नेताओं को मिली जगह – तमिल समुदाय के लिए गौरव का क्षण

सिंगापुर की राजनीति में तमिल समुदाय की भागीदारी लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। यह छोटा सा द्वीपीय राष्ट्र बहुसांस्कृतिक समाज और प्रभावी प्रशासन के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। हाल ही में हुए आम चुनावों में, सत्तारूढ़ पीपुल्स एक्शन पार्टी (PAP) ने 97 सीटों में से 87 पर जीत हासिल कर फिर से सत्ता पर काबिज हो गई है।

इस जीत के बाद गठित की गई नई मंत्रिपरिषद में छह तमिल नेताओं को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया है, जो न केवल सिंगापुर के तमिल भाषी नागरिकों के लिए बल्कि वैश्विक तमिल समुदाय के लिए भी गर्व का विषय है।

मंत्रिपरिषद में शामिल तमिल नेता:

  1. के. शनमुगम – उन्हें गृह मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है। वे पहले भी इस पद पर रह चुके हैं और उनके पास आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था का व्यापक अनुभव है।
  2. विवियन बालकृष्णन – उन्हें विदेश मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है। वह सिंगापुर का वैश्विक मंचों पर प्रतिनिधित्व करते हैं और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मज़बूती प्रदान करते हैं।
  3. इंद्राणी राजा – उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय की मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है। वे शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।
  4. दिनेश वासु दास – उन्हें दक्षिण-पूर्व जिले के महापौर (मेयर) के रूप में नामित किया गया है। वे जमीनी स्तर के प्रशासन और सामुदायिक विकास में अनुभव रखते हैं।
  5. जनिल पुथुचेरी – उन्हें शिक्षा और पर्यावरण मंत्रालय में वरिष्ठ राज्य मंत्री बनाया गया है। वे पूर्व में स्वास्थ्य मंत्रालय में भी कार्य कर चुके हैं और शिक्षा व पर्यावरण नीति में योगदान दे रहे हैं।
  6. मुरली पिल्लई – वे कानून और परिवहन मंत्रालय के वरिष्ठ राज्य मंत्री के रूप में नियुक्त हुए हैं। उनके पास कानूनी क्षेत्र का गहरा अनुभव है और वे सार्वजनिक नीति में भी दक्ष हैं।

तमिल समुदाय को मिला सम्मान

इन सभी नेताओं ने कानून, शिक्षा, सार्वजनिक सेवा और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में अपनी योग्यता और प्रतिबद्धता साबित की है। सिंगापुर की नई मंत्रिपरिषद में उनकी नियुक्ति यह दर्शाती है कि देश में योग्यता आधारित राजनीति और सांस्कृतिक समावेशिता को महत्व दिया जाता है।

यह नियुक्तियाँ न केवल तमिल समुदाय के लिए बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणास्पद हैं जो मेहनत, शिक्षा और सेवा के माध्यम से समाज में ऊँचाई प्राप्त करना चाहता है। इससे यह भी संदेश मिलता है कि तमिल लोग चाहे दुनिया के किसी भी कोने में हों, वे अपनी प्रतिभा और समर्पण से नेतृत्व के शीर्ष स्थान तक पहुँच सकते हैं।

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