भारत के ऑपरेशन सिंधूर को जर्मनी का दृढ़ समर्थन

भारत के ऑपरेशन सिंधूर को जर्मनी का दृढ़ समर्थन

2025 की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों की जान गई। इसके जवाब में भारत ने एक सटीक और निर्णायक सैन्य अभियान – ऑपरेशन सिंधूर – शुरू किया। इस ऑपरेशन का मकसद सीमा पार स्थित आतंकी शिविरों को नष्ट करना था। यह अभियान भारत की आतंकवाद के विरुद्ध मजबूत नीति का उदाहरण बना।

इस बीच, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर आधिकारिक यूरोपीय दौरे पर गए। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने जर्मनी की विदेश मंत्री योहान वेल्पेल से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा, पहलगाम हमला और भारत के ऑपरेशन सिंधूर जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक के बाद जर्मन विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि “भारत को आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच युद्धविराम की स्थिति सराहनीय है और इससे क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा मिलेगा।

जर्मनी का यह समर्थन भारत के लिए कूटनीतिक रूप से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह न केवल भारत की सुरक्षा रणनीति को अंतरराष्ट्रीय वैधता प्रदान करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रमुख वैश्विक शक्तियां भारत की स्थिति और उसके आत्मरक्षा के अधिकार को समझ रही हैं और उसे समर्थन दे रही हैं।

इस बैठक में सुरक्षा के अलावा, व्यापार, तकनीकी सहयोग, रक्षा साझेदारी जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। लेकिन केंद्र में आतंकवाद के विरुद्ध भारत के अभियान को ही प्रमुख रूप से रखा गया। जर्मनी की इस प्रतिक्रिया से यह साफ है कि वह आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक संघर्ष में भारत के साथ है।

जर्मनी यूरोपीय संघ का एक प्रमुख सदस्य और नाटो का प्रभावशाली सहयोगी देश है। उसकी यह स्थिति अन्य यूरोपीय देशों को भी भारत की ओर सकारात्मक रूप से देखने के लिए प्रेरित कर सकती है।

संक्षेप में, ऑपरेशन सिंधूर केवल एक सैन्य सफलता नहीं बल्कि एक कूटनीतिक जीत भी है। जर्मनी जैसे शक्तिशाली देश का समर्थन भारत की विदेश नीति और सुरक्षा दृष्टिकोण को और अधिक मजबूत बनाता है। यह समर्थन यह संकेत देता है कि आज की वैश्विक दुनिया में आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय एकता और सहयोग की आवश्यकता है, और भारत इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

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