ऑपरेशन सिंधुर और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के पाकिस्तान संबंधी रुख में बदलाव
भारत की निर्णायक ऑपरेशन सिंधुर के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान के प्रति नीति में उल्लेखनीय बदलाव आया है। ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के नेताओं की प्रशंसा और अमेरिका की नीति में यह बदलाव गहरे भू-राजनीतिक संतुलन को दर्शाता है।
ऑपरेशन सिंधुर की पृष्ठभूमि
ऑपरेशन सिंधुर ऐसे गुप्त सूचनाओं के आधार पर शुरू किया गया था, जिनमें बताया गया कि पाकिस्तान लगातार भारत विरोधी आतंकवादी संगठनों को समर्थन दे रहा है। लश्कर-ए-तैबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिद्दीन जैसे संगठन पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी ISI से वित्तीय, सैन्य, ठिकाने, और विचारधारा संबंधी गुप्त सहायता प्राप्त कर रहे हैं।
पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के अंदर मिसाइल हमले किए, जिन्हें पाकिस्तान रोक नहीं पाया। इसके बावजूद पाकिस्तान ने भारत पर 400 से अधिक ड्रोन और मिसाइल हमले किए, लेकिन भारतीय वायु रक्षा को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा।
भारत ने बदले में पाकिस्तान के वायु रक्षा तंत्र और महत्वपूर्ण हवाई ठिकानों को नष्ट कर दिया। इस सैन्य दबाव के बाद पाकिस्तान, जो परमाणु शक्ति संपन्न देश है, युद्ध समाप्ति के लिए बातचीत का प्रस्ताव लेकर आया। भारत ने स्पष्ट किया कि कोई भी सीमा पार आतंकवादी हमला युद्ध घोषित करने जैसा होगा और पुनः जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
पाकिस्तान का आतंकवाद के प्रति समर्थन
पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने मारे गए आतंकवादियों को सरकारी सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी, जिससे आतंकवाद और पाकिस्तान के बीच संबंध प्रकट हुए। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान से कोई भी वार्ता केवल कश्मीर के पाकिस्तान कब्जे वाले हिस्से तक ही सीमित रहेगी।
इसके अलावा, सिंधु जल संधि को भारत ने अपने नियंत्रण में लिए बिना समाप्त कर दिया, जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका था।
परमाणु खतरे और क्षेत्रीय सुरक्षा
भारत ने चेतावनी दी कि वह परमाणु हथियारों के पहले उपयोग को स्वीकार नहीं करेगा और इसकी पुनः समीक्षा कर सकता है। पाकिस्तान में बढ़ते आतंकवादी और अलगाववादी खतरे भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ा रहे हैं।
ट्रंप की नीति में बदलाव
राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के नेताओं की सराहना की और वहां की सेना के प्रमुख को फील्ड मार्शल बनाए जाने का समर्थन किया, जो नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यह अमेरिका के भारत के साथ बढ़ते व्यापार संबंधों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न करता है।
भारत की कूटनीतिक रणनीति
भारत ने विश्व के सात क्षेत्रों में अपने प्रतिनिधि दल भेजे हैं, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्य देश भी शामिल हैं, ताकि पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन को उजागर किया जा सके।
यूरोपीय संघ और अरब देश भी भारत के आत्मरक्षा अधिकार का समर्थन कर रहे हैं। चीन पाकिस्तान को सैन्य सहायता दे रहा है जबकि तुर्की पर भारत ने निगाह रखी है। बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को भारत ने अभी तक कूटनीतिक समझाने के लिए दल नहीं भेजे हैं।
इजरायल ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के कदमों का समर्थन किया है, हालांकि भारत ने वहां भी प्रतिनिधि दल नहीं भेजे।
भू-राजनीतिक प्रभाव
ट्रंप ने शुरू में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम की घोषणा की थी और मध्यस्थता की इच्छा जताई, लेकिन भारत ने कश्मीर मामले में किसी भी मध्यस्थता को अस्वीकार किया। पाकिस्तान युद्ध और परमाणु खतरे को बनाए रखने की इच्छा रखता है। ट्रंप की टिप्पणियां पाकिस्तान के एजेंडे को अप्रत्यक्ष रूप से मदद कर रही हैं।
हाल ही में ट्रंप ने पाकिस्तान के नेताओं की चीन और अन्य मुस्लिम देशों से अधिक प्रशंसा की, जिसके कारण पाकिस्तान ने अपने सेना प्रमुख को फील्ड मार्शल बनाया।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंधुर और उसके बाद ट्रंप की नीति परिवर्तन ने भारत की आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धता को दिखाया है। भारत ने पाकिस्तान के आतंकवादी ढांचे को कड़ी चोट पहुंचाई है, लेकिन ट्रंप के रुख ने क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीतिक माहौल को जटिल बना दिया है।
भारत अपने कूटनीतिक प्रयासों को मजबूत कर रहा है और पाकिस्तान के आतंकवादी समर्थन के खिलाफ सख्त रुख बनाए हुए है। इस क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जटिलताओं के बीच सतर्कता आवश्यक है।