जोहान्सबर्ग की सोने की खान में बड़ा हादसा – 260 मजदूर सुरक्षित रेस्क्यू

जोहान्सबर्ग की सोने की खान में बड़ा हादसा – 260 मजदूर सुरक्षित रेस्क्यू

दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में स्थित एक सोने की खान में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब खान में काम कर रहे लगभग 260 मजदूर अचानक फंस गए। यह हादसा उस समय हुआ जब खदान में उपयोग की जा रही लिफ्ट तकनीकी खराबी के कारण अचानक बंद हो गई और मजदूर खान की गहराई में फंस गए।

दक्षिण अफ्रीका की अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण योगदान है। देश में हजारों कोयला और सोने की खदानें चल रही हैं, जिनमें लाखों लोग कार्यरत हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि इनमें से कई खदानों में पर्याप्त सुरक्षा सुविधाएं नहीं हैं। पुराने उपकरणों और कमजोर बुनियादी ढांचे की वजह से आए दिन दुर्घटनाएँ होती रहती हैं। इस बार जोहान्सबर्ग की यह खदान एक बड़े हादसे की चपेट में आ गई।

हादसे के दिन मजदूर सामान्य रूप से खान में सोना निकालने का कार्य कर रहे थे। तभी मुख्य लिफ्ट अचानक काम करना बंद कर दी। यह लिफ्ट मजदूरों को खदान की गहराई से बाहर लाने का एकमात्र माध्यम थी। लिफ्ट के बंद हो जाने के बाद मजदूर खान के अंदर फंस गए और बाहर से उनका कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था।

घटना की जानकारी मिलते ही राहत और बचाव दल, तकनीकी विशेषज्ञ तथा चिकित्सा टीम मौके पर पहुँच गई। चूँकि खदान काफी गहरी थी, इसलिए राहत कार्य काफी कठिन और जोखिम भरा था। लेकिन घंटों की मेहनत के बाद सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यह खबर सुनते ही मजदूरों के परिजन जो बाहर बेचैनी से इंतज़ार कर रहे थे, उन्होंने राहत की सांस ली।

यह घटना एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका की खनन नीतियों और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। मजदूरों की जान खतरे में डालकर खदानें चलाना न केवल अमानवीय है, बल्कि सरकार और खदान संचालकों की लापरवाही को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है कि सभी खदानों में सुरक्षा उपकरणों का आधुनिकीकरण, नियमित निरीक्षण और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए।

फिलहाल खदान प्रबंधन के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। लिफ्ट में आई तकनीकी खराबी का कारण जानने के लिए इंजीनियरों की एक टीम गठित की गई है। इस पूरे हादसे में राहत की बात यह रही कि कोई जानमाल की हानि नहीं हुई।

यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ मजदूरों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन पर सख्ती से अमल भी ज़रूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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