रूस-यूक्रेन युद्ध: 1,186वां दिन – क्या यह विनाश कभी रुकेगा?
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध आज 1,186वें दिन में प्रवेश कर गया है। 24 फरवरी 2022 को शुरू हुआ यह संघर्ष कुछ ही हफ्तों में समाप्त हो जाएगा, ऐसी उम्मीद की गई थी। लेकिन यह युद्ध अब तीन वर्षों से अधिक समय तक चल चुका है और 21वीं सदी के सबसे लंबे और विनाशकारी युद्धों में से एक बन गया है।
इस युद्ध ने यूक्रेन में भारी तबाही मचाई है। हजारों लोगों की जान जा चुकी है, कई शहर पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं, और लाखों लोग अपने घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं। अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन जैसे कई पश्चिमी देश यूक्रेन को आर्थिक और सैन्य सहायता लगातार प्रदान कर रहे हैं। वहीं रूस लगातार आक्रमण तेज करता जा रहा है, ताकि वह अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित रख सके।
युद्ध को समाप्त करने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय प्रयास किए गए, लेकिन वे विफल रहे। तुर्की, चीन और संयुक्त राष्ट्र जैसी शक्तियों ने शांति वार्ता के लिए मध्यस्थता की कोशिश की, परंतु कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। रूस और यूक्रेन ने कई बार सीधी बातचीत की, लेकिन उन वार्ताओं से कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। इसके परिणामस्वरूप युद्ध और अधिक गहराता जा रहा है।
22 मई 2025 को रूस ने एक बड़ा हमला किया जिसमें ड्रोन और मिसाइलों का उपयोग किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में 266 ड्रोन और 45 मिसाइलें दागी गईं। 13 लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। अस्पतालों, रिहायशी इमारतों और अन्य नागरिक ढांचों को नुकसान पहुंचा। मानवाधिकार संगठनों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया है।
यह युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव डाल रहा है। रूस से तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा के कारण ऊर्जा कीमतें आसमान छू रही हैं। यूक्रेन से अनाज की आपूर्ति रुकने से खाद्य संकट गहराता जा रहा है। महंगाई और आपूर्ति श्रृंखलाओं की गड़बड़ी से दुनिया के कई देशों की आम जनता प्रभावित हो रही है।
इस स्थिति में, जब तक दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार नहीं होते, युद्ध का अंत होता नहीं दिख रहा। यूक्रेन अपने क्षेत्र वापस लेने के लिए लड़ रहा है और रूस अपने कब्जे को बनाए रखने के लिए। इस राजनीतिक संघर्ष में सबसे ज्यादा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है—खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को।
निष्कर्षतः, रूस-यूक्रेन युद्ध का कोई स्पष्ट अंत नहीं दिख रहा है। हर दिन के साथ यह संघर्ष और भी अधिक पीड़ादायक बनता जा रहा है। विश्व अब एक और हमले की नहीं, बल्कि एक ठोस और स्थायी शांति की उम्मीद कर रहा है जो इस दुखद अध्याय को समाप्त कर सके।