भारत का ‘सूर्या VHF रडार’: स्टेल्थ फाइटर विमानों के विरुद्ध आत्मनिर्भर सुरक्षा कवच

भारत का ‘सूर्या VHF रडार’: स्टेल्थ फाइटर विमानों के विरुद्ध आत्मनिर्भर सुरक्षा कवच

जैसे ही पाकिस्तान को चीन से 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ लड़ाकू विमान मिलने वाले हैं, भारत ने एक बड़ा कदम उठाते हुए इन विमानों का पता लगाने में सक्षम एक स्वदेशी रडार सिस्टम विकसित किया है। ‘Anti-Stealth Surya VHF Radar’ नामक यह प्रणाली भारत की रक्षा तकनीक में एक क्रांतिकारी प्रगति मानी जा रही है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है।


पुरानी प्रणालियों को बदलने की आवश्यकता

भारतीय वायुसेना अभी भी कुछ सोवियत युग के P-18 प्रारंभिक चेतावनी रडारों का उपयोग करती है, जो कि Ural-4320 ट्रकों पर लगाए गए हैं। ये प्रणाली अब आधुनिक और स्टेल्थ खतरे का सामना करने में असमर्थ होती जा रही हैं। आज के युग में जहाँ ड्रोन, क्रूज मिसाइलें और स्टेल्थ तकनीक वाले फाइटर जेट सामने आ चुके हैं, भारत को अब अत्याधुनिक रडार तकनीकों की आवश्यकता है।


स्टेल्थ विमान: एक नया खतरा

चीन द्वारा विकसित J-20 और J-35A जैसे स्टेल्थ लड़ाकू विमान, रडार से बचने के लिए बनाए गए हैं। पाकिस्तान इन विमानों को खरीदने की योजना बना रहा है। इससे भारत के पारंपरिक रडार सिस्टम को खतरा उत्पन्न हो गया है क्योंकि ये विमान सामान्य रडार की पकड़ में नहीं आते।


‘सूर्या VHF रडार’: स्वदेशी समाधान

बेंगलुरु स्थित Alpha Design Technologies नामक रक्षा कंपनी ने भारतीय वायुसेना के लिए इस चुनौती का समाधान खोजते हुए ‘Surya VHF Radar’ विकसित किया है। यह एक मोबाइल, 3D, अत्याधुनिक रडार प्रणाली है, जो स्टेल्थ विमानों का पता लगाने में सक्षम है।

सरकार ने ऐसे 6 रडार सिस्टम के लिए ₹200 करोड़ का ऑर्डर दिया है। मार्च 2025 में पहला रडार भारतीय वायुसेना को सौंप दिया गया।


रडार की मुख्य विशेषताएं

  • VHF बैंड (30 से 300 MHz) में काम करता है
  • 15 किलोमीटर ऊंचाई तक की निगरानी क्षमता
  • 360 डिग्री कवर करने वाला स्कैन क्षेत्र
  • 400 किलोमीटर तक की रेंज (2 वर्ग मीटर RCS वाले लक्ष्य के लिए)
  • दो 6×6 भारी ट्रकों पर तैनात (एक एंटीना, एक कंट्रोल सेंटर)

स्टेल्थ तकनीक सामान्यत: X-बैंड रडार से बचने के लिए डिजाइन की जाती है, लेकिन VHF बैंड की लंबी तरंगें इन विमानों के आकार और सामग्री से टकराकर उन्हें पकड़ सकती हैं। यही कारण है कि सूर्या रडार J-20 और J-35A जैसे विमानों का पता लगा सकता है।


मल्टी-लेयर एयर डिफेंस में भूमिका

भारत एक मल्टी-लेयर वायु रक्षा प्रणाली विकसित कर रहा है, जिसमें शामिल हैं:

  • S-400 ट्रायंफ प्रणाली
  • आकाश और आकाश-NG मिसाइल प्रणाली
  • अश्विनि, अरुध्र और रोहिणी 3D रडार

‘सूर्या VHF रडार’ इस सुरक्षा प्रणाली की पहली परत के रूप में काम करेगा। जैसे ही कोई स्टेल्थ विमान इसकी पकड़ में आएगा, इसकी सूचना बाकी उच्च-फ्रीक्वेंसी रडार और इंटरसेप्टर मिसाइलों को दी जाएगी।


ऑपरेशन सिंदूर: एक सीख

ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने पाकिस्तान द्वारा भेजे गए सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। इस दौरान S-400, आकाश और रडार प्रणाली ने बेहतरीन प्रदर्शन किया।

अब यदि स्टेल्थ तकनीक वाले विमान भी हमले में शामिल हों, तो ‘सूर्या रडार’ उन्हें पहले ही पहचान कर चेतावनी देने में सक्षम होगा।


आत्मनिर्भर भारत की एक उपलब्धि

‘सूर्या VHF रडार’ पूरी तरह से स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। यह रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता को कम करता है और देश की तकनीकी स्वतंत्रता को दर्शाता है।

यह न केवल भारत की जरूरतें पूरी करता है, बल्कि भविष्य में भारत को रक्षा तकनीक निर्यातक देश बनाने में भी सहायक होगा।


स्टेल्थ के विरुद्ध VHF रडार क्यों प्रभावी है?

स्टेल्थ तकनीक सामान्यतः X-बैंड और C-बैंड की रडार तरंगों से बचने के लिए डिज़ाइन की जाती है। लेकिन VHF (Very High Frequency) बैंड की तरंगें लंबी होती हैं, जिससे वे किसी वस्तु की सतह पर अधिक प्रभाव डालती हैं और उसे पहचान सकती हैं।

हालाँकि VHF रडार की सटीकता थोड़ी कम होती है, पर यह शुरुआती चेतावनी देने में सक्षम होता है, जिससे अन्य रडार और हथियार प्रणालियाँ लक्ष्य पर सटीक हमला कर सकती हैं।


रणनीतिक प्रभाव

भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच बदलते रणनीतिक समीकरण में ‘सूर्या VHF रडार’ जैसे सिस्टम:

  • दुश्मनों को डराने और रोकने में सक्षम हैं
  • स्टेल्थ खतरे की पहचान और जवाब देने में मदद करते हैं
  • आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत करते हैं
  • भविष्य में भारत को रक्षा उद्योग में वैश्विक खिलाड़ी बना सकते हैं

निष्कर्ष: भारत के आसमान की नई रक्षा दीवार

Anti-Stealth Surya VHF Radar’ सिर्फ एक तकनीकी उपकरण नहीं है, यह भारत की रक्षा रणनीति में एक नया अध्याय है। यह सिस्टम ऐसे समय में आया है जब स्टेल्थ और ड्रोन तकनीकें क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बनती जा रही हैं।

स्वदेशी रूप से विकसित यह रडार भारत को प्रारंभिक चेतावनी, अधिकतम सतर्कता, और त्वरित प्रतिक्रिया जैसी महत्वपूर्ण क्षमताएं प्रदान करता है।

यह रडार न केवल भारत की वायुसेना को मजबूत बनाता है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी है।

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