पाकिस्तान को वैश्विक आतंकवाद की जननी के रूप में अलग-थलग करने की भारत की कूटनीतिक रणनीतियाँ

पाकिस्तान को वैश्विक आतंकवाद की जननी के रूप में अलग-थलग करने की भारत की कूटनीतिक रणनीतियाँ

आतंकवाद के खिलाफ भारत की एकजुट राजनीतिक आवाज़ वैश्विक मंच पर गूंज रही है

आतंकवाद आज वैश्विक स्तर पर एक गंभीर चुनौती बन चुका है। शांति, सुरक्षा और विकास को खतरे में डालने वाला यह जहर अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। ऐसे में जब पाकिस्तान पर बार-बार आतंकवाद को शह देने और आतंकवादी गुटों को आश्रय देने का आरोप लगता है, भारत ने इसे लेकर एक सख्त रुख अपनाया है।

भारत ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया है कि “आतंकवाद के लिए शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance)” की नीति अपनाई जाएगी। इस नीति के तहत भारत ने एक अनूठा कूटनीतिक कदम उठाया है — सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं को मिलाकर बनी 7 संसदीय समितियों को 30 से अधिक देशों में भेजा गया है, ताकि वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को आतंकवाद का जनक बताया जा सके और भारत की स्थिति स्पष्ट की जा सके।

भारत की राजनीतिक एकजुटता का ऐतिहासिक उदाहरण

इन 7 समितियों में कुल 59 सांसद शामिल हैं, जिनमें सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के 31 सांसद और विपक्षी दलों के 30 सांसद हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में बीजेपी के रविशंकर प्रसाद और बैजयंत जय पांडा, जेडीयू के संजय झा, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, कांग्रेस के शशि थरूर, डीएमके की कनिमोझी और एनसीपी की सुप्रिया सुले जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

ये सभी सांसद विभिन्न देशों में जाकर न सिर्फ भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, बल्कि एकजुट होकर यह संदेश दे रहे हैं कि भारत आतंकवाद के खिलाफ पूरी तरह प्रतिबद्ध है और पाकिस्तान को उसका समर्थन देना बंद करना चाहिए।

पाकिस्तान के खिलाफ एक सुर में बोलते हुए भारतीय नेता

इस अभियान की खासियत यह है कि इसमें विपक्षी दलों के नेता भी उतनी ही मुखरता से भारत की नीति का समर्थन कर रहे हैं जितना कि सत्तारूढ़ दल। एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, जो आम तौर पर बीजेपी की कटु आलोचना करते हैं, उन्होंने भी साफ शब्दों में कहा,

“हम भारतीय पहले हैं, और हिंदू, मुस्लिम या ईसाई बाद में। देश की सुरक्षा राजनीति से ऊपर है।”

उन्होंने कहा कि पुलवामा, उरी, मुंबई, पाम्बन और हाल में पहलगाम जैसे आतंकी हमलों के बाद भारत को कड़ा रुख अपनाना ही होगा।

ऑपरेशन सिंदूर — भारत की निर्णायक सैन्य कार्रवाई

हाल ही में हुए पाहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई के रूप में “ऑपरेशन सिंदूर” नामक सैन्य मिशन चलाया। यह मिशन अत्यंत सटीक और प्रभावशाली रहा, जिसमें आतंकियों के गढ़ को निशाना बनाकर उन्हें समाप्त किया गया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा,

“अब समय आ गया है कि हम आतंकवाद के खिलाफ सख्ती और चतुराई से लड़ें। ऑपरेशन सिंदूर इसी नीति का हिस्सा है। यह सिर्फ जवाबी हमला नहीं, बल्कि एक रणनीतिक बदलाव है।”

पाकिस्तान के दोगले रवैये को उजागर करती भारत की मुहिम

भारत की यह वैश्विक कूटनीतिक यात्रा केवल प्रचार नहीं है, बल्कि एक तथ्य-आधारित अभियान है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने उन सभी घटनाओं को रेखांकित किया है जहाँ पाकिस्तान ने सीधे या परोक्ष रूप से आतंकवादियों को शरण दी —
9/11 का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में सेना की छावनी में छिपा मिला था
इसी तरह, हाफिज सईद, मसूद अजहर जैसे आतंकवादी पाकिस्तान में आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।

भारत के सभी दलों की चेतावनी: पाकिस्तान को समर्थन = आतंकवाद को समर्थन

टीएमसी के अभिषेक बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा,

“जो देश पाकिस्तान को आर्थिक या सैन्य सहायता दे रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद को प्रोत्साहित कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत के पास ऐसे अनेकों सबूत हैं जो यह साबित करते हैं कि पाकिस्तान की सरकार और सेना आतंकवादियों को समर्थन देती रही है।

डीएमके की कनिमोழी और भारत-पाक संबंधों का यथार्थ

डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा कि

“भारत के सभी प्रधानमंत्रियों ने — अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर नरेंद्र मोदी तक — पाकिस्तान से संबंध सुधारने की कोशिश की। लेकिन हर बार भारत को आतंकवाद का सामना करना पड़ा।”

यह स्पष्ट संकेत है कि पाकिस्तान की नीयत में खोट है और उसे वैश्विक मंच पर बेनकाब करना जरूरी है।

शिवसेना का वक्तव्य: ऑपरेशन सिंदूर एक नीति परिवर्तन है

शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा,

“ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं है, यह भारत की रक्षा नीति में बड़ा परिवर्तन है। भारत अब आतंकवाद पर सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सक्रिय रोकथाम की नीति अपना रहा है।”

भारत का वैश्विक संदेश: पाकिस्तान केवल भारत की नहीं, दुनिया की समस्या है

इस कूटनीतिक पहल के जरिए भारत यह संदेश दे रहा है कि पाकिस्तान द्वारा पनपाया गया आतंकवाद सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है।
भारत एक जिम्मेदार लोकतंत्र होने के नाते आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक अभियान का नेतृत्व कर रहा है।

निष्कर्ष: भारत की नई कूटनीतिक आक्रामकता

भारत की यह नीति कि “आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस” होनी चाहिए, आज एक वैश्विक दृष्टिकोण बनती जा रही है। जब भारत की सत्तापक्ष और विपक्ष एक साथ मंच साझा कर रहे हैं, तो यह दुनिया के लिए एक स्पष्ट संकेत है —
पाकिस्तान को अब या तो आतंकवाद से नाता तोड़ना होगा या फिर वैश्विक रूप से अलग-थलग पड़ना होगा।

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