सिंगापुर: शांग्री-ला संवाद में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान ने उभरती युद्ध प्रणालियों और एआई के खतरे को लेकर दी चेतावनी
सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांग्री-ला संवाद (Shangri-La Dialogue) में भारत के मूख्य रक्षा अध्यक्ष (CDS) जनरल अनिल चौहान ने हिस्सा लिया। इस वैश्विक सुरक्षा सम्मेलन में विभिन्न देशों के शीर्ष रक्षा अधिकारी एकत्रित हुए, जहां आधुनिक युद्ध प्रणाली, उभरती तकनीकी चुनौतियाँ और सुरक्षा से जुड़ी रणनीतियों पर चर्चा हुई।
इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, जापान, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों के रक्षा प्रमुख शामिल हुए। यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे बड़ा सुरक्षा मंच माना जाता है।
जनरल अनिल चौहान ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक नहीं रहेंगे। अब युद्ध की रूपरेखा तेजी से बदलती तकनीकों और भू-राजनीतिक तनावों से निर्धारित होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि आज तकनीक ने इतनी शक्ति प्रदान कर दी है कि गैर-राज्य तत्व भी गुप्त और परोक्ष युद्ध छेड़ सकते हैं, जिससे वैश्विक अस्थिरता उत्पन्न हो रही है।
उन्होंने भविष्य के युद्ध की चार प्रमुख प्रवृत्तियों को रेखांकित किया:
- सेंसर टेक्नोलॉजी का विस्तार – जो खुफिया और निगरानी क्षमताओं को अत्यधिक बढ़ा रहा है।
- हाइपरसोनिक और सटीक मार करने वाले हथियारों का विकास – जो लंबी दूरी से बेहद सटीकता के साथ हमला कर सकते हैं।
- स्वचालित प्रणालियाँ (Autonomous Systems) – जैसे ड्रोन और बिना पायलट वाले वाहन जो इंसानी दखल के बिना कार्य कर सकते हैं।
- एआई, मशीन लर्निंग, एलएलएम (बड़े भाषा मॉडल) और क्वांटम तकनीक – जो युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल सकती हैं।
जनरल चौहान ने आगाह किया कि यह तकनीकी क्रांति जितनी मददगार हो सकती है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है यदि इसका दुरुपयोग किया जाए। खासकर जब ये तकनीकें असुरक्षित हाथों में चली जाती हैं तो वे वैश्विक अस्थिरता फैला सकती हैं।
भारत के प्रयास
उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। निजी क्षेत्र के साथ मिलकर भारत एक सशक्त और स्थानीय रक्षा निर्माण प्रणाली बना रहा है, जो न सिर्फ भारतीय सेना की जरूरतें पूरी करेगी बल्कि वैश्विक मानकों पर भी खरी उतरेगी।
अपने वक्तव्य में उन्होंने भारत की रणनीतिक सोच, उसकी तकनीकी क्षमता और बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में देश की भूमिका को प्रभावी रूप से सामने रखा।
निष्कर्ष:
शांग्री-ला संवाद, देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और सुरक्षा खतरों का समाधान ढूंढ़ने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। जनरल अनिल चौहान की बातें स्पष्ट करती हैं कि भारत न केवल रक्षा क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है, बल्कि विश्व स्तर पर एक निर्णायक भूमिका निभाने के लिए भी तैयार है।