तेजस MK1A: भारत की वायुसेना की आत्मनिर्भर उड़ान
पाकिस्तान को अमेरिका और चीन जैसे देशों से अत्याधुनिक लड़ाकू विमान मिलते जा रहे हैं, ऐसे में भारत ने अपनी वायुसेना को स्वदेशी ताकत से मजबूत करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है – तेजस MK1A, एक स्वदेश निर्मित हल्का लड़ाकू विमान (LCA), जो भारतीय वायुसेना की रीढ़ बनता जा रहा है।
भारत सरकार की योजना के अनुसार, अगले मार्च तक 6 तेजस MK1A विमान वायुसेना में शामिल कर दिए जाएंगे। यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
पाकिस्तान की वायुसेना – आयात पर निर्भरता
पाकिस्तान की वायुसेना का मुख्य आधार है अमेरिकी F-16 फाइटर जेट, जो एक समय में अत्यधिक सक्षम माना जाता था। लेकिन अब पाकिस्तान के पास मौजूद F-16 विमान काफी हद तक पुराने मॉडल के हो चुके हैं।
इस कमजोरी को पूरा करने के लिए चीन, पाकिस्तान को 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट (जैसे J-31) देने की तैयारी में है। इस प्रकार, दक्षिण एशिया में हवाई शक्ति का संतुलन भारत के लिए चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
भारत का स्वदेशी उत्तर – तेजस
भारत ने इस चुनौती का सामना करते हुए दूसरे देशों से आयात के बजाय स्वदेशी निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया है। इस दिशा में, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने मिलकर तेजस परियोजना शुरू की।
पहली बार 2015 में तेजस MK1 को वायुसेना में शामिल किया गया था। अब इसका उन्नत संस्करण, तेजस MK1A, आधुनिक तकनीकों के साथ तैयार किया गया है और इसे भारत की सुरक्षा क्षमताओं में एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है।
तेजस MK1A की प्रमुख विशेषताएं
- 4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट
- AESA (Active Electronically Scanned Array) रडार से लैस
- अत्याधुनिक Avionics और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम
- Beyond Visual Range (BVR) मिसाइलों से लैस
- GE F404-IN20 इंजन द्वारा संचालित
- अधिकतम गति: 2,222 किलोमीटर प्रति घंटा
- वायु रक्षा, समुद्री गश्त, और ज़मीनी हमलों में सक्षम
- BrahMos-NG जैसी मिसाइलों को भी ले जाने में सक्षम
उत्पादन और खरीद सौदे
2021 में भारत सरकार ने HAL के साथ ₹48,000 करोड़ की लागत से 83 तेजस MK1A विमानों के लिए समझौता किया। इसके बाद, ₹67,000 करोड़ की लागत से 97 अतिरिक्त विमानों की खरीद का प्रस्ताव भी सामने आया।
भारत की योजना है कि 2031 तक 180 तेजस MK1A विमान वायुसेना में शामिल कर लिए जाएं।
तेजस विमानों का उत्पादन तीन प्रमुख संयंत्रों में हो रहा है – दो बेंगलुरु में और एक नासिक में। हर साल करीब 24 विमान तैयार किए जा सकते हैं।
स्वदेशी उद्योग और आर्थिक प्रभाव
तेजस परियोजना में भारत की 6300 से अधिक घरेलू कंपनियां जुड़ी हुई हैं, जिनमें से 2448 छोटे और मध्यम उद्योग (MSMEs) हैं। यह परियोजना स्वदेशी तकनीक, रोजगार सृजन, और स्थानीय सप्लाई चेन को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण साधन बन गई है।
यह भारत के “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को भी प्रत्यक्ष रूप से समर्थन प्रदान करता है।
भविष्य की योजनाएं
- मार्च 2026 तक 6 तेजस MK1A विमान वायुसेना में शामिल हो जाएंगे
- दिसंबर 2025 तक कुल 12 विमान वायुसेना को सौंपे जाएंगे
- उन्नत संस्करण तेजस MK2 भी विकासाधीन है
- AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) – भारत का 5वीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर – भविष्य की योजना
- इसके साथ-साथ वायुसेना और थलसेना के लिए 156 लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (LCH) की खरीद प्रक्रिया भी चल रही है, जिसकी अनुमानित लागत ₹1.3 लाख करोड़ है।
वैश्विक विमानों से तुलना
तेजस MK1A की तुलना अमेरिका के F-16, फ्रांस के Rafale, और रूस के MiG-29 जैसे विमानों से की जा रही है। कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस तकनीकी रूप से इन विमानों के समकक्ष है, और लागत, रखरखाव और उन्नयन में कहीं अधिक लाभकारी है।
तेजस की सबसे बड़ी ताकत है इसका ओपन आर्किटेक्चर, जिसके चलते इसमें भविष्य में स्वदेशी तकनीक के साथ सुधार और अपडेट संभव हैं। इसके विपरीत, आयातित विमानों में यह सुविधा नहीं मिलती।
निष्कर्ष
तेजस MK1A केवल एक लड़ाकू विमान नहीं है – यह भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और रणनीतिक आत्मविश्वास का प्रतीक है। जैसे-जैसे दक्षिण एशिया में वायु शक्ति की होड़ तेज़ हो रही है, भारत ने एक साहसिक और दूरदर्शी रास्ता चुना है – स्वदेशी नवाचार और निर्माण का।
2031 तक जब तेजस के 180 विमान वायुसेना में होंगे, तब यह भारत को न सिर्फ एक एयरोस्पेस ताकत बनाएगा, बल्कि वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में भी स्थापित करेगा।