“सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट पर बीजेपी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी बचकाना हरकत है” – अन्नामलाई का डीएमके सरकार पर हमला
बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने बीजेपी से जुड़े प्रवीण राज की गिरफ्तारी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे “बचकाना हरकत” करार देते हुए डीएमके सरकार पर पुलिस बल का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा:
“तमिलनाडु बीजेपी से जुड़े प्रवीण राज को सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया जाना अत्यंत निंदनीय है।”
अन्नामलाई ने अपने पोस्ट में आगे कहा कि तमिलनाडु में कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, लेकिन राज्य सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सिर्फ सोशल मीडिया पर निगरानी में ही पुलिस बल को झोंक रही है।
उन्होंने कहा कि:
- राज्य में नशीले पदार्थों का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है,
- महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में वृद्धि हो रही है,
- अकेले रहने वाले बुजुर्गों की हत्या जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
इन तमाम गंभीर कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याओं के बावजूद, डीएमके सरकार का सारा ध्यान सिर्फ यह देखने में है कि कौन सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना कर रहा है।
अन्नामलाई ने मुख्यमंत्री स्टालिन पर तंज कसते हुए सवाल किया:
“क्या मुख्यमंत्री स्टालिन को शर्म नहीं आती कि वह पूरे तमिलनाडु पुलिस बल को सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट पर नजर रखने में लगा रहे हैं, जबकि राज्य में असंख्य अपराध हो रहे हैं?”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि:
“जब डीएमके के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी नेताओं पर अशोभनीय और अपमानजनक टिप्पणियां करते हैं, तब उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। लेकिन जब एक साधारण बीजेपी कार्यकर्ता कुछ पोस्ट करता है तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता है। यह दोहरा रवैया बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”
अपनी बात को समाप्त करते हुए अन्नामलाई ने चेतावनी दी:
“बीजेपी कार्यकर्ताओं को तुच्छ कारणों से गिरफ्तार करना बचकानी हरकत है। डीएमके को याद रखना चाहिए कि सत्ता और अधिकार हमेशा के लिए नहीं होते।”
पृष्ठभूमि:
बीजेपी कार्यकर्ता प्रवीण राज को एक सोशल मीडिया पोस्ट के चलते हाल ही में तमिलनाडु में गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे बीजेपी के नेताओं में आक्रोश है। अन्नामलाई ने इस गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध बताया और राज्य सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया।