अजित कुमार की मौत के बाद तमिलनाडु के डीजीपी शंकर जीवाल ने विशेष पुलिस इकाइयों को भंग करने का आदेश दिया
तमिलनाडु के तिरुप्पुवनम में एक युवक अजित कुमार की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया है। इस घटना के बाद, तमिलनाडु पुलिस महानिदेशक (DGP) शंकर जीवाल ने एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य भर में कार्यरत सभी विशेष पुलिस इकाइयों (Special Units) को तुरंत भंग करने का आदेश दिया है।
🔹 डीजीपी का बड़ा फैसला:
- सभी जिलों में पुलिस अधीक्षकों (SP) और उप अधीक्षकों (DSP) के अधीन काम कर रही विशेष टीमों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।
- साथ ही महानगरों में सह-पुलिस आयुक्तों (Joint Commissioners), उप पुलिस आयुक्तों (DCP) और सहायक पुलिस आयुक्तों (ACP) के अंतर्गत बिना स्वीकृति काम कर रही विशेष टीमों को भी भंग कर दिया गया है।
- डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी विशेष अपराध की प्रकृति के आधार पर ही अस्थायी विशेष टीमें गठित की जाएंगी और यह पूर्ण रूप से नियमबद्ध तरीके से होगा।
🔹 घटना की पृष्ठभूमि:
सिवगंगई जिले के युवक अजित कुमार को विशेष पुलिस टीम के सदस्यों ने पूछताछ के लिए उठाया था। पूछताछ के दौरान उस पर कथित रूप से काफी बर्बरता से हमला किया गया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।
इस घटना ने राज्य में जनता में भारी आक्रोश और पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया है।
✅ निर्णय का महत्व:
डीजीपी शंकर जीवाल का यह निर्णय पुलिस व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि बिना निगरानी और पारदर्शिता के काम करने वाली विशेष पुलिस इकाइयां जनता की सुरक्षा के बजाय खतरा बन सकती हैं।
इस फैसले का उद्देश्य जनता का विश्वास पुनः स्थापित करना, पुलिस जांच को विधिसम्मत बनाना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।