थिरुमला मिल्क कंपनी के मैनेजर नवीन की रहस्यमयी मौत: आत्महत्या या हत्या? उठ रहे हैं कई सवाल
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के माधवरम क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई जब थिरुमला मिल्क कंपनी में खजांची (Treasury Manager) के रूप में काम कर रहे नवीन पोलिनेनी की लाश उनके घर के पास हाथ बंधी हुई अवस्था में फांसी पर लटकी मिली। पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया, लेकिन जैसे-जैसे तथ्य सामने आ रहे हैं, यह मामला एक सामान्य आत्महत्या नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या या कॉर्पोरेट साजिश का हिस्सा लग रहा है।
क्या था नवीन की मौत के पीछे का सच? क्या वह सचमुच मानसिक दबाव में आत्महत्या कर बैठे? या फिर वह किसी बड़ी घोटालेबाज़ी का बलि का बकरा बनाए गए?
आइए इस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करते हैं।
🧑💼 नवीन पोलिनेनी कौन थे?
नवीन पोलिनेनी आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के वाय्यूर गाँव के रहने वाले थे। उन्होंने वित्त (Finance) में विशेषज्ञता हासिल की थी और कई वर्षों तक विभिन्न कंपनियों में काम किया। पिछले तीन सालों से, वह चेन्नई स्थित थिरुमला मिल्क कंपनी में खजांची के पद पर कार्यरत थे।
उनकी जिम्मेदारी में था कंपनी की करोड़ों की वित्तीय लेनदेन का संचालन। सहकर्मी उन्हें एक ईमानदार और मेहनती कर्मचारी के रूप में जानते थे, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से वह मानसिक तनाव में दिख रहे थे — जो अब जाकर एक रहस्यमयी मौत में तब्दील हो चुका है।
💸 40 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का खुलासा
कंपनी की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में नवीन के कार्यकाल के दौरान 40 करोड़ रुपये की भारी गड़बड़ी का पता चला। यह पैसा, रिपोर्ट के अनुसार, नवीन के परिजनों और दोस्तों के खातों में ट्रांसफर किया गया था।
ऑडिट रिपोर्ट के बाद, थिरुमला मिल्क कंपनी ने चेन्नई के कोलाथुर ज़ोन के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) पांडियाराजन को शिकायत सौंपी। पुलिस ने नवीन को पूछताछ के लिए बुलाया।
बताया जाता है कि नवीन ने पुलिस के सामने गलती स्वीकार की और कहा कि वह पैसा लौटाने को तैयार हैं, लेकिन कृपया उन्हें गिरफ्तार न किया जाए। इसके बावजूद, उन्हें बार-बार पूछताछ के लिए बुलाया गया और मानसिक दबाव डाला गया।
📧 नवीन की आखिरी ईमेल: “मेरी मौत तुम्हारे साम्राज्य को हिला देगी”
मौत से कुछ घंटे पहले, नवीन ने एक ईमेल भेजा — जिसमें उन्होंने आत्महत्या करने की सूचना दी थी।
उन्होंने अपनी बहन और थिरुमला मिल्क के अधिकारियों को लिखते हुए कहा:
“मैं अपनी गलती मानता हूं। मैं पैसा लौटाने के लिए तैयार हूं। लेकिन जो धमकियां दी जा रही हैं, वह मैं सहन नहीं कर सकता। मेरी मौत तुम्हारे साम्राज्य को हिला देगी…”
यह ईमेल साफ संकेत देता है कि नवीन ने आत्महत्या स्वेच्छा से नहीं, बल्कि किसी मजबूरी या दबाव में की।
🧍♂️ हाथ बंधे हुए मिले नवीन की लाश – आत्महत्या कैसे संभव?
नवीन की लाश उनके घर के पास हाथ बंधे हुए, फांसी पर लटकी हुई मिली। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों ने तुरंत सवाल खड़े किए:
- कोई व्यक्ति अपने दोनों हाथ बांधकर कैसे फांसी लगा सकता है?
- अगर यह आत्महत्या थी, तो उसने अपने हाथ क्यों बांधे?
- क्या यह किसी ने हत्या कर आत्महत्या का रूप दिया?
नवीन के परिवार वालों ने भी साफ तौर पर इसे साजिशन हत्या बताया है। उनका कहना है कि:
- नवीन आत्महत्या जैसा कदम उठाने वाला व्यक्ति नहीं था।
- कंपनी के अधिकारियों ने उन्हें धमकियाँ दी थीं।
- पुलिस ने उन्हें बार-बार बुलाकर मानसिक प्रताड़ना दी।
👮♂️ पुलिस पर सवाल – ACP पांडियाराजन की भूमिका संदेह के घेरे में
कोलाथुर के ACP पांडियाराजन इस पूरे मामले में घोर संदेह के केंद्र में हैं। उन पर निम्नलिखित आरोप लगे हैं:
- ₹40 करोड़ के घोटाले की शिकायत को अपने वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट नहीं किया।
- कंपनी के अधिकारियों के साथ मिलकर नवीन को डराया और धमकाया।
- पहले भी, पांडियाराजन पर महिला प्रदर्शनकारियों को पीटने और पोल्लाची यौन शोषण केस में पीड़िताओं के नाम उजागर करने जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं।
ऐसे पुलिस अधिकारी पर इतना गंभीर आर्थिक अपराध और मानसिक प्रताड़ना का केस छोड़ना, अपने आप में सवाल खड़े करता है।
🔥 राजनीतिक प्रतिक्रिया: “पुलिस व्यवस्था या कॉर्पोरेट की कठपुतली?”
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब तिरुप्पुवनम में पुलिस हिरासत में हुई मौत ने पहले से ही तमिलनाडु सरकार को सवालों के घेरे में डाल रखा है।
अब नवीन की रहस्यमयी मौत ने फिर से दिखाया है कि:
- पुलिस आम आदमी पर दबाव बनाने में लगी रहती है।
- बड़ी कंपनियों के लिए पुलिस “संपत्ति सुरक्षा एजेंसी” बन चुकी है।
- गरीब और मध्यमवर्गीय कर्मचारी, सिस्टम के बलि का बकरा बन जाते हैं।
विपक्षी नेताओं ने मांग की है:
- इस केस की CBI या न्यायिक जांच करवाई जाए।
- ACP पांडियाराजन को सस्पेंड किया जाए।
- थिरुमला मिल्क कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
🚨 सुनियोजित दबाव और नियंत्रण – क्यों नहीं उजागर किया गया घोटाला पहले?
नवीन की मौत के बाद ही ₹40 करोड़ के घोटाले की बात सामने आई। इससे यह सवाल खड़ा होता है:
- क्या कंपनी इस घोटाले को गुप्त रखना चाहती थी?
- क्या पुलिस जानबूझकर इसे दबा रही थी?
- क्या नवीन को बलि का बकरा बना कर, बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही थी?
नवीन के परिजन यह भी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने कंपनी अधिकारियों द्वारा दी गई धमकियों की सूचना पुलिस को दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई सुरक्षा नहीं दी।
🔁 तुरंत कार्रवाई – पुलिस अधिकारियों के तबादले
सार्वजनिक आक्रोश के बाद, कुछ तात्कालिक प्रशासनिक कदम उठाए गए:
- माधवरम क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर को मामले से हटा दिया गया।
- ACP पांडियाराजन को दैनिक कार्यों से रोक दिया गया है।
- केस की जांच अब पश्चिमी जोन के डिप्टी कमिश्नर को सौंपी गई है।
लेकिन जनमानस का मानना है कि यह सिर्फ “डैमेज कंट्रोल” है, असली न्याय नहीं।
अब तक के अनुत्तरित सवाल:
- नवीन ने हाथ बंधे हुए कैसे आत्महत्या की?
- उनके ईमेल के बाद भी उन्हें सुरक्षा क्यों नहीं दी गई?
- ACP ने घोटाले की सूचना वरिष्ठों को क्यों नहीं दी?
- पुलिस ने नवीन से इतने कड़े तरीके से पूछताछ क्यों की?
- पांडियाराजन ने अचानक छुट्टी क्यों ली?
एक आदमी की मौत नहीं – सिस्टम की नाकामी का प्रतीक
नवीन की मौत एक व्यक्तिगत त्रासदी ही नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की विफलता का प्रतीक है। यह दिखाता है कि:
- कॉर्पोरेट ताकतें किस तरह कर्मचारियों को इस्तेमाल करती हैं।
- पुलिस किस तरह मालिकों के पक्ष में खड़ी होती है।
- कर्मचारियों की मानसिक सुरक्षा, कानूनी सहायता, और व्हिसलब्लोअर सुरक्षा लगभग नगण्य है।
नवीन की आखिरी पंक्तियाँ —
“मेरी मौत तुम्हारे साम्राज्य को हिला देगी…”
—सिर्फ एक भावनात्मक संवाद नहीं, बल्कि एक पुकार है न्याय के लिए।
निष्कर्ष: क्या नवीन को मिलेगा न्याय?
जब तक निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच नहीं होती — यह कहना मुश्किल है कि नवीन की मौत आत्महत्या थी या साजिशन हत्या।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की जान नहीं, बल्कि पूरे समाज, कानून और कॉर्पोरेट तंत्र पर सवालिया निशान है।