मदुरै अम्मा तिड़ल में भव्य मुरुगन भक्त सम्मेलन: “अरूहारा” नारों से गूंज उठा आयोजन स्थल
तमिलनाडु के मदुरै शहर में स्थित पांडिकोविल अम्मा तिड़ल में हिंदू मुन्नानी संगठन की ओर से एक भव्य मुरुगन भक्त सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आध्यात्मिक महोत्सव तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों मुरुग भक्तों की उपस्थिति से एक ऐतिहासिक आयोजन बन गया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य मुरुगन भक्तों को एक साथ एकत्रित करना और सामूहिक भक्ति के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करना था। भक्तों ने अरुपडई वीधु (भगवान मुरुगन के छह पवित्र निवास) के रूप में प्रतीकात्मक पूजा अर्चना की। जब पूरा मैदान “अरूहारा!” नारों से गूंज उठा, तब वह स्थान एक ऊर्जा और भक्ति के महासागर में परिवर्तित हो गया। मदुरै के चिथिरई उत्सव को भी पीछे छोड़ देने वाला यह जनसमूह आयोजन की भव्यता का प्रमाण बना।
इस आध्यात्मिक समारोह में कई प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक हस्तियों ने भाग लिया। भाजपा तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष नयनार नागेन्द्रन, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण, और भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अन्नामलाई सहित कई गणमान्य अतिथि मंच पर उपस्थित थे। इसके साथ ही, एआईएडीएमके के पूर्व मंत्री आर.बी. उदयकुमार, सेल्लूर राजू, कडंबूर राजू, के.टी. राजेन्द्र बालाजी, वरिष्ठ भाजपा नेता, मठ प्रमुख, और अनेक आध्यात्मिक गुरु भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक पंबई वाद्य यंत्र की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद बालक सूर्य नारायणन ने अपने मधुर कंठ से मुरुगन पर एक भक्ति गीत प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर पूरा मैदान मंत्रमुग्ध हो गया। सभी भक्त उस बालक की आवाज़ में भक्ति की गहराई महसूस कर सके।
मंच से सिरव आधीनम के प्रमुख श्री रामानंद कुमारगुरुपर स्वामीजी ने भी भक्तिभाव से ओतप्रोत भाषण दिया। उन्हें विशेष रूप से तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर में विशाखा तिथि पर पूजित ‘वेल’ (भाला) भेंट स्वरूप प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें उनके आध्यात्मिक योगदान के लिए दिया गया।
इसके पश्चात कलाकारों ने भगवान शिव और देवी पार्वती के वेश में एक सुंदर नृत्य प्रस्तुति दी, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। नृत्य में धार्मिक भावनाओं और पौराणिक कथाओं की सुंदर झलक दिखी। इसके अतिरिक्त कई सांस्कृतिक और भक्ति कार्यक्रमों ने आयोजन को जीवंत बना दिया।
यह मुरुगन भक्त सम्मेलन न केवल एक धार्मिक समागम था, बल्कि यह भक्ति, संस्कृति और एकता का प्रतीक बनकर उभरा। तमिल संस्कृति में मुरुग भक्ति की गहराई को उजागर करने वाला यह सम्मेलन, भावी पीढ़ियों को भी आध्यात्मिक प्रेरणा देता रहेगा।