आतंक के खिलाफ भारत का करारा जवाब: ऑपरेशन सिंधु
पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके में हुए आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस जघन्य हमले का करारा जवाब देने के लिए भारत ने एक निर्णायक कदम उठाते हुए “ऑपरेशन सिंधु” के तहत पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मौजूद आतंकवादी ठिकानों पर बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है।
यह ऑपरेशन 6 मई की रात 1:44 बजे शुरू हुआ और पूरी रात जारी रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे अभियान की निगरानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद की। उन्होंने रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के शीर्ष अधिकारियों से लगातार जानकारी ली और हर रणनीतिक निर्णय पर बारीकी से नजर रखी।
भारतीय रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि यह ऑपरेशन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया। ये दोनों संगठन लंबे समय से भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं और इनकी फंडिंग और प्रशिक्षण पाकिस्तान से होता है।
तीनों सेनाओं – थल सेना, वायु सेना और नौसेना – ने समन्वय के साथ इस कार्रवाई को अंजाम दिया। उच्च तकनीकी सर्विलांस, ड्रोन और सैटेलाइट आधारित निगरानी से लक्ष्य की पुष्टि की गई और फिर हमले किए गए। खास बात यह है कि इस पूरे ऑपरेशन में आम नागरिकों, पाकिस्तान की आर्थिक संरचना या पाकिस्तानी सेना के ठिकानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी कार्रवाई केवल आतंकवाद के खिलाफ है, पाकिस्तान की आम जनता या राज्य से नहीं।
प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत निगरानी में चला यह अभियान यह दर्शाता है कि भारत अब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और हर हमले का माकूल जवाब दिया जाएगा। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑपरेशन आने वाले समय में आतंकियों और उन्हें समर्थन देने वाले संगठनों के लिए एक कड़ा संदेश होगा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी इस पर नजर है और माना जा रहा है कि भारत की सटीक, सीमित और उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई को वैश्विक स्तर पर समर्थन मिल सकता है, विशेषकर उन देशों से जो खुद भी आतंकवाद से जूझ रहे हैं।
ऑपरेशन सिंधु भारत की सैन्य शक्ति, रणनीतिक सोच और राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतीक बनकर उभरा है। यह स्पष्ट संदेश है — भारत आतंक के खिलाफ एकजुट है और जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा।