सीमा पार हमला: पाकिस्तान की नापाक हरकत और भारत की करारा जवाबी कार्रवाई

सीमा पार हमला: पाकिस्तान की नापाक हरकत और भारत की करारा जवाबी कार्रवाई

भारत-पाकिस्तान सीमा पर एक बार फिर तनाव अपने चरम पर है। हाल ही में पाकिस्तान सेना द्वारा की गई बेतुकी गोलाबारी में तीन निर्दोष भारतीय नागरिकों की जान चली गई, जिससे पूरे देश में शोक और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। यह हमला जम्मू-कश्मीर की नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के पास हुआ, जो न केवल संघर्ष विराम का उल्लंघन है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का भी खुला अपमान है।

इस हमले के जवाब में भारतीय सेना ने एक रणनीतिक और सटीक कार्रवाई की है जिसे “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया है। यह हमला रात के समय किया गया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित कम से कम 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। भारत की यह कार्रवाई केवल बदले की भावना से नहीं, बल्कि आतंक के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने की दृढ़ इच्छाशक्ति से प्रेरित थी।

इससे पहले, पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया था। उसी हमले का बदला लेने और सीमा पार चल रहे आतंकी ढांचे को ध्वस्त करने के लिए भारतीय सेना ने यह जवाबी हमला किया। लेकिन इसके बाद पाकिस्तान ने एक बार फिर अपना असली चेहरा दिखाया और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाकर सीमा पार से बेतुकी गोलीबारी शुरू कर दी।

पाकिस्तान की यह हरकत न केवल अमानवीय है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों और जिनेवा संधियों का भी उल्लंघन है। नागरिक क्षेत्रों पर गोलीबारी करना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है और इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा की जानी चाहिए।

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह शांति का पक्षधर है, लेकिन अपनी सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा के लिए कोई भी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। भारतीय रक्षा मंत्रालय और सेना की ओर से यह कहा गया है कि पाकिस्तान की हर हरकत का सटीक और प्रभावी जवाब दिया जाएगा। साथ ही, सीमा पर सुरक्षा को और अधिक मजबूत किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की घुसपैठ को रोका जा सके।

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते कितने संवेदनशील हैं। दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं, इसलिए छोटी सी भी चूक बड़े संघर्ष को जन्म दे सकती है। ऐसे में वैश्विक समुदाय को चाहिए कि वह पाकिस्तान पर दबाव बनाए और उसे आतंकवाद के समर्थन से रोके।

निष्कर्षतः, भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह आतंकवाद और अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं करेगा। पाकिस्तान को भी समझना होगा कि नागरिकों को निशाना बनाकर वह कभी भी अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल नहीं कर सकता। शांति की स्थापना तभी संभव है जब दोनों देश ज़मीन पर और अंतरात्मा से संघर्ष विराम का पालन करें और आतंकवाद को जड़ से समाप्त करें।

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