ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद पर भारतीय सेना का करारा प्रहार
भारत लंबे समय से सीमा पार से आतंकवाद का सामना करता आ रहा है, विशेषकर कश्मीर क्षेत्र में। जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसी आतंकवादी संगठन कई वर्षों से भारत के विरुद्ध हिंसक हमले कर रही है। हाल ही में, पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कई भारतीय सैनिक शहीद हो गए। इस हमले का बदला लेने के लिए भारत ने एक सटीक और निर्णायक सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसे नाम दिया गया – “ऑपरेशन सिंदूर”।
यह अभियान अचानक नहीं, बल्कि पूरी तरह से योजनाबद्ध और खुफिया जानकारी पर आधारित था। भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित 9 प्रमुख आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जो जैश-ए-मोहम्मद के नियंत्रण में थे। इस हमले में जैश प्रमुख मसूद अज़हर के परिवार के 10 सदस्य और उसके 4 करीबी सहयोगी मारे गए।
इस अभियान की सफलता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है जैश-ए-मोहम्मद का खुद एक आधिकारिक बयान जारी कर इन हत्याओं की पुष्टि करना। यह बेहद दुर्लभ होता है जब कोई आतंकी संगठन अपनी क्षति को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करे। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय सेना का यह प्रहार कितना प्रभावी और सटीक था।
मसूद अज़हर, जो वर्षों से भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों का मास्टरमाइंड रहा है, को अब न केवल व्यक्तिगत हानि झेलनी पड़ी है, बल्कि उसकी संगठनात्मक ताकत को भी बड़ा झटका लगा है। उसके निकट सहयोगियों की मौत जैश की आगामी योजनाओं को कमजोर कर सकती है।
ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति को दर्शाता है। यह दुनिया को यह संदेश देता है कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। इस तरह की रणनीतिक सैन्य कार्रवाई से भारत की खुफिया और रक्षा क्षमताओं की मजबूती भी जाहिर होती है।
इस कार्रवाई ने न केवल जैश को एक मजबूत संदेश दिया है, बल्कि उन सभी संगठनों को चेतावनी दी है जो भारत की अखंडता को खतरे में डालना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मसूद अज़हर की पारिवारिक और संगठनात्मक क्षति से जैश को निकट भविष्य में भारी नुकसान होगा।
यह अभियान एक उदाहरण है कि जब राष्ट्र की सुरक्षा की बात आती है, तो भारत शांत नहीं बैठता – वह निर्णायक कदम उठाता है।