भारत की पहली महिला राफेल पायलट – शिवांगी सिंह

भारत की पहली महिला राफेल पायलट – शिवांगी सिंह

एक छोटी सी लड़की के दिल में जो सपना जन्मा था, वह आज भारत के आसमान में उड़ान भर चुका है। शिवांगी सिंह, जो कभी नई दिल्ली के भारतीय वायुसेना संग्रहालय में खड़ी होकर हैरान थीं, अब दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमान राफेल को उड़ाती हैं। आज वह गर्व से भारत की पहली महिला पायलट हैं, जिन्होंने राफेल लड़ाकू विमान को उड़ाया, जो तेज़ी, ताकत और आधुनिक युद्ध का प्रतीक है।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जन्मी शिवांगी सिंह एक मेधावी छात्रा थीं, जिन्होंने शिक्षा और खेल दोनों ही क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। जब वह छोटी थीं, तब नई दिल्ली के वायुसेना संग्रहालय की यात्रा ने उनके अंदर एक विशेष सपना जागृत किया। वह उस पल को अपनी साहसिक यात्रा की शुरुआत मानती हैं। लड़ाकू विमानों को करीब से देखकर वह चकित हो गईं और तभी से उनके मन में यह दृढ़ निश्चय था कि उन्हें एक दिन विमान में बैठना है।

भारतीय वायुसेना (IAF) ने 1995 में अपनी रैंक में महिलाओं को शामिल करना शुरू किया था, लेकिन 2015 तक महिलाओं को लड़ाकू विमान उड़ाने की अनुमति नहीं थी। शिवांगी सिंह उन महिलाओं की पहली पीढ़ी में से एक हैं, जिन्हें इस भूमिका में आने का मौका मिला, जो भारतीय समाज और सशस्त्र बलों के विकास और आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

शिवांगी का राफेल विमान तक का सफर आसान नहीं था। शुरुआत में उन्होंने मिग-21 बायसन पर प्रशिक्षण लिया, जो भारत का सबसे पुराना लड़ाकू विमान है। इसे उड़ाना अत्यधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इसकी लैंडिंग और टेकऑफ स्पीड बहुत अधिक है। शिवांगी अपनी पहली अकेली उड़ान को लेकर बहुत घबराई और चिंतित थीं, लेकिन बाद में उन्होंने इसे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ याद किया। लड़ाकू विमान उड़ाना वास्तव में उच्चतम स्तर की दक्षता और नियंत्रण की मांग करता है, जिसे शिवांगी ने अपने प्रशिक्षण के दौरान सीखा।

2020 में, कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद शिवांगी को राफेल उड़ाने के लिए प्रशिक्षित किया गया। उन्हें फ्रांसीसी प्रशिक्षकों के तहत सिमुलेटर प्रशिक्षण दिया गया और इसके बाद असली राफेल विमान उड़ाने का मौका मिला। यह उनकी व्यक्तिगत जीत ही नहीं, बल्कि भारतीय महिलाओं के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि थी।

शिवांगी अपनी माँ को अपनी प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत मानती हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, “मेरी माँ नहीं चाहती थीं कि मैं केवल पढ़ाई में अव्‍वल रहूं, बल्कि वह चाहती थीं कि मैं आत्मनिर्भर बनूं और उन्होंने मेरे हर कदम में मुझे समर्थन दिया।” शिवांगी के पति भी एक लड़ाकू पायलट हैं, और दोनों की पेशेवर समझ एक दूसरे से मेल खाती है।

2023 तक, भारतीय वायुसेना में 1,600 से अधिक महिला अधिकारी शामिल हो चुकी हैं, जिनमें से कई लड़ाकू विमान पायलट हैं। शिवांगी सिंह आज एक प्रेरणा बन चुकी हैं, जो यह साबित करती हैं कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो कोई भी बाधा असंभव नहीं होती—यहां तक कि ध्वनि की दीवार भी नहीं।

उनकी कहानी भारतीय लड़कियों को यह याद दिलाती है कि कोई भी सपना बड़ा नहीं है, अगर उसे पूरा करने की हिम्मत हो।

Facebook Comments Box