जनरल असीम मुनीर: पाकिस्तान की कश्मीर नीति और भारत से टकराव के पीछे का चेहरा

जनरल असीम मुनीर: पाकिस्तान की कश्मीर नीति और भारत से टकराव के पीछे का चेहरा

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। युद्ध जैसी स्थिति बन रही है, और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक प्रमुख नाम है – पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर

पाकिस्तान में सेना का राजनीति में दखल कोई नई बात नहीं है। वहाँ की सरकारें बनाना और गिराना रावलपिंडी (सेना मुख्यालय) के इशारे पर होता है। विशेष रूप से कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तानी सेना हमेशा कठोर रुख अपनाती रही है, और असीम मुनीर भी उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

जनरल असीम मुनीर, एक इस्लामी धर्मगुरु के बेटे हैं। उन्होंने मंगला स्थित सैन्य प्रशिक्षण संस्थान से शिक्षा प्राप्त की और 1986 में पाकिस्तानी सेना में शामिल हुए। बाद में वह ISI (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) के प्रमुख भी बने, लेकिन महज़ आठ महीनों में ही हटा दिए गए। वर्ष 2022 में, पाकिस्तान के गहरे आर्थिक संकट के दौरान वे सेना प्रमुख बने और अब देश की सबसे शक्तिशाली हस्ती माने जाते हैं।

असीम मुनीर अपने पूर्ववर्ती जनरल बाजवा से काफी अलग हैं। उन्होंने भारत से शांतिपूर्ण संबंधों की कोई पहल नहीं की है। इसके विपरीत, उन्होंने कश्मीर को लेकर कड़ा और कट्टर रुख अपनाया है।

5 फरवरी 2025 को मुझफ्फराबाद में ‘कश्मीर एकता दिवस’ के मौके पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने कश्मीर के लिए तीन युद्ध लड़े हैं और ज़रूरत पड़ी तो दस और लड़ने को तैयार है। इस सभा में पहली बार हामास और हिज़्बुल्लाह जैसे आतंकी संगठनों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया, जिससे यह संकेत मिला कि अब पाकिस्तान कश्मीर को “मजहबी जिहाद” का रूप दे रहा है।

उन्होंने एक प्रवासी पाकिस्तानी सम्मेलन में यहां तक कहा कि “हम हर चीज में हिंदुओं से अलग हैं — धर्म से लेकर जीवनशैली तक”, जिससे धार्मिक नफरत को खुलकर उकसाया गया

जनरल असीम मुनीर ने कश्मीर को पाकिस्तान की “जगुलर वेन” (कंठनाड़ी) बताया और कहा कि पाकिस्तान कभी कश्मीरी लोगों को नहीं छोड़ेगा।

उनके इस उग्र भाषण के ठीक पाँच दिन बाद, पहलगाम में 26 हिंदू यात्रियों की हत्या कर दी गई, जो पाक समर्थित आतंकियों द्वारा की गई एक सुनियोजित हिंसक कार्रवाई मानी जा रही है।

यह हमला सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं, बल्कि कश्मीर की आर्थिक प्रगति और शांति को बाधित करने का प्रयास था। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर में शिक्षा, रोज़गार और बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ है। आतंकियों की भर्ती में भारी गिरावट आई है — अब वहाँ सिर्फ 80 सक्रिय आतंकी हैं, जिनमें से केवल 18 स्थानीय हैं।

इस स्थिति से बौखलाए असीम मुनीर, फिर से कश्मीर में अस्थिरता लाने की कोशिश कर रहे हैं

भारत सरकार ने इस हमले के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने सेना को पूर्ण स्वतंत्रता दे दी है कि वह ज़रूरत पड़ने पर कठोर कार्रवाई करे।

संक्षेप में कहा जाए तो, असीम मुनीर की कट्टरपंथी और उकसाऊ नीतियाँ पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने के साथ-साथ, उसके खुद के विनाश का रास्ता भी तैयार कर रही हैं

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