ऑपरेशन सिंधूर: भारत ने मिसाइल हमला कर पाकिस्तान के रक्षा तंत्र की पोल खोली
पुलवामा जैसे आतंकी हमले का जवाब देते हुए भारत ने “ऑपरेशन सिंधूर” नामक एक सटीक और योजनाबद्ध सैन्य कार्रवाई के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित 9 आतंकी अड्डों पर हमला किया। इस हमले में भारत ने 24 मिसाइलें दागी और केवल 25 मिनटों में 21 आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। इस अभियान की सफलता ने भारत की रक्षा तकनीक की ताकत को एक बार फिर साबित कर दिया है।
इस हमले के बाद पाकिस्तान में एक बड़ा सवाल उठ रहा है – इतने आधुनिक हथियार और वायु रक्षा प्रणालियों के बावजूद पाकिस्तान भारत की मिसाइलों को क्यों नहीं रोक पाया?
दरअसल, पाकिस्तान ने चीन से अत्याधुनिक HQ-9 वायु रक्षा प्रणाली खरीदी है, जिसे 2021 में अपनी सेना में शामिल किया गया था। यह प्रणाली 125 से 300 किलोमीटर तक की दूरी पर आने वाली हवाई वस्तुओं को नष्ट करने में सक्षम बताई जाती है। HQ-9B संस्करण तो एक साथ 100 लक्ष्यों को ट्रैक करने की भी क्षमता रखता है।
फिर भी, भारत की मिसाइलें पाकिस्तानी रक्षा घेरे को भेदते हुए अपने लक्ष्य पर सटीक रूप से जा पहुंचीं। यह साफ दर्शाता है कि HQ-9 प्रणाली भारतीय मिसाइल तकनीक के आगे विफल साबित हुई। भारत की ओर से प्रयोग किए गए राफेल, सुखोई-30 और ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम अत्याधुनिक और अति सटीक हैं।
भारत ने फ्रांस से 2016 में 36 राफेल लड़ाकू विमानों का समझौता किया था, जिनमें से अधिकांश अब भारतीय वायुसेना में तैनात हैं। अब भारत और फ्रांस ने नौसेना के लिए 26 और राफेल विमानों की खरीद पर भी समझौता किया है।
उधर, पाकिस्तान ने चीन से 20 J-10CE लड़ाकू विमान और लगभग 50 JF-17 Block III विमान प्राप्त किए हैं। इन विमानों में लगे PL-15 मिसाइलें 300 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम हैं, लेकिन विश्लेषकों के अनुसार यह भारत के S-400 जैसे आधुनिक रक्षा सिस्टम का मुकाबला नहीं कर सकतीं।
इसके अलावा, पाकिस्तान सीमा पर गोलीबारी के लिए चीनी SH-15 तोप प्रणाली और तुर्की व चीन से प्राप्त ड्रोन का भी प्रयोग कर रहा है।
एक आंकड़े के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान द्वारा आयात किए गए कुल रक्षा उपकरणों में से 81% चीन से आए हैं। इससे पाकिस्तान की चीन पर अत्यधिक निर्भरता भी उजागर होती है।
ऑपरेशन सिंधूर ने यह साबित कर दिया है कि भारत की रक्षा प्रणाली कहीं अधिक उन्नत, सटीक और प्रभावशाली है। पाकिस्तान की तकनीकी क्षमता भारत की वायुशक्ति और मिसाइल प्रणाली का मुकाबला करने में असमर्थ नजर आती है। इस हमले ने भारत की रणनीतिक बढ़त को और मजबूत किया है।