पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन ‘सिंधु’ में ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल संभव: भारत की सैन्य सटीकता का प्रतीक
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के आतंकी ढांचों को निशाना बनाने के लिए भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंधु’ के तहत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। यह ऑपरेशन भारत की सैन्य शक्ति और राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा के प्रति अटूट संकल्प का प्रतीक माना जा रहा है।
भारत ने अपनी मिसाइल तकनीक की यात्रा 1983 में ‘एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम’ (IGMDP) के साथ शुरू की थी। इस कार्यक्रम को भारत के मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में शुरू किया गया था। इस योजना के अंतर्गत पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, आकाश और नाग जैसी स्वदेशी मिसाइलें विकसित की गईं।
1990 के दशक में खाड़ी युद्ध के बाद, भारत को अत्याधुनिक एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम की आवश्यकता महसूस हुई। 1998 में भारत और रूस ने मिलकर ब्रह्मोस एयरोस्पेस नामक संयुक्त उद्यम स्थापित किया। ‘ब्रह्मोस’ नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी से लिया गया है।
ब्रह्मोस दुनिया की एकमात्र सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल प्रणाली है, जो अत्यधिक सटीकता और मैच 2.8 (लगभग 3430 किमी/घंटा) की गति से अपने लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। यह मिसाइल ज़मीन, समुद्र, वायु और पनडुब्बी जैसे सभी प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है, और दिन-रात व किसी भी मौसम में काम कर सकती है।
यह “फायर एंड फॉरगेट” सिद्धांत पर काम करती है, यानी एक बार लॉन्च होने के बाद इसे किसी दिशा-निर्देश की जरूरत नहीं होती। इसके उच्च वेग और विस्फोटक शक्ति के कारण यह दुश्मन पर भीषण तबाही मचाने में सक्षम है।
ब्रह्मोस मिसाइल को 2001 में पहली बार परीक्षण किया गया, और तब से इसे भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना में शामिल किया जा चुका है। 2005 से इसे आईएनएस राजपूत जैसे युद्धपोतों में तैनात किया गया है, और 2007 से थलसेना में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है। इसे सुखोई-30 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों से भी सफलतापूर्वक दागा गया है।
पहले ब्रह्मोस की रेंज 290 किमी तक सीमित थी, लेकिन अब इसके जल और भूमि संस्करण की रेंज 900 किमी और हवाई संस्करण की रेंज 1500 किमी तक बढ़ा दी गई है।
हाल ही में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण और परीक्षण केंद्र का उद्घाटन किया। यह केंद्र 300 करोड़ की लागत से 80 एकड़ में बनाया गया है, जो प्रति वर्ष 80 से 100 मिसाइलों का उत्पादन करेगा। भविष्य में यह क्षमता बढ़ाकर 150 मिसाइल प्रतिवर्ष की जाएगी। नई पीढ़ी की ब्रह्मोस मिसाइलें हल्की (1290 किलो) और अत्यधिक घातक होंगी।
फिलीपींस, ब्राजील, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देश ब्रह्मोस खरीदने की प्रक्रिया में हैं, जबकि मलेशिया, मिस्र और ओमान जैसे देशों ने भी दिलचस्पी दिखाई है।
अगर ‘ऑपरेशन सिंधु’ में ब्रह्मोस का उपयोग हुआ है, तो यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति और वैश्विक सैन्य स्थिति को और भी मजबूत बनाता है।