पाकिस्तान की परमाणु धमकियों से भारत कभी नहीं डरेगा – प्रधानमंत्री मोदी

पाकिस्तान की परमाणु धमकियों से भारत कभी नहीं डरेगा – प्रधानमंत्री मोदी

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध हमेशा से तनावपूर्ण रहे हैं। सीमाई झड़पों, आतंकी हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों का सिलसिला लंबे समय से जारी है। हाल ही में 7 मई को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले में निर्दोष तीर्थयात्रियों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया, जिसे पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा अंजाम दिया गया।

इस क्रूर हमले के जवाब में भारतीय सेना ने “ऑपरेशन सिंधूर” नामक एक विशेष सैन्य अभियान शुरू किया। इस ऑपरेशन में ड्रोन, मिसाइल और जमीनी हमलों के ज़रिए आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त किया गया। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह आतंक के खिलाफ किसी भी हद तक जा सकता है और यह कार्रवाई उसी संकल्प का प्रमाण थी।

ऑपरेशन सिंधूर की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश के माध्यम से देश को संबोधित किया। अपने भावुक भाषण में उन्होंने इस सफलता को भारत की बेटियों को समर्पित किया और कहा कि यह न्याय की लड़ाई थी, जिसे हमारे सैनिकों ने जीत लिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान की ओर से बार-बार दी जाने वाली परमाणु हमले की धमकियों को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि भारत कभी नहीं डरेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय सेना को पूरी आज़ादी दी गई है कि वे देश की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं। “हमारे ड्रोन और मिसाइलों ने कई आतंकी ठिकानों को समाप्त कर दिया है। 7 मई को जो हमने किया, उसे पूरी दुनिया ने देखा,” उन्होंने कहा।

मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले को लेकर अपनी व्यक्तिगत पीड़ा को भी साझा किया और कहा कि मासूम तीर्थयात्रियों को धर्म के नाम पर मार देना इंसानियत पर सबसे बड़ा धब्बा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आतंकवादियों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि भारत इतनी कड़ी और सटीक प्रतिक्रिया देगा।

प्रधानमंत्री का यह भाषण न सिर्फ आतंकवादियों के लिए चेतावनी था, बल्कि देशवासियों के लिए एक आश्वासन भी था कि सरकार उनकी सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ऑपरेशन सिंधूर के माध्यम से भारत ने यह दिखा दिया कि वह न तो आतंक सहन करेगा और न ही परमाणु धमकियों के आगे झुकेगा।

भारत शांति चाहता है, लेकिन अगर उसकी संप्रभुता और नागरिकों पर हमला होता है, तो वह हर कीमत पर जवाब देने को तैयार है। यह नया रुख भारत की ताकत, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व को दर्शाता है।

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