कुचक्र का अंत: प्रेम संबंध का विरोध करने पर पत्नी ने की सेना के पूर्व जवान की निर्मम हत्या

कुचक्र का अंत: प्रेम संबंध का विरोध करने पर पत्नी ने की सेना के पूर्व जवान की निर्मम हत्या

परिवार का आधार विश्वास होता है। जब यही विश्वास स्वार्थ और अवैध संबंधों की भेंट चढ़ जाता है, तब उसका परिणाम भयानक और दिल दहला देने वाला होता है। उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले में घटित यह निर्मम हत्या इसका ताज़ा और चौंकाने वाला उदाहरण है।

62 वर्षीय देवेंद्र कुमार, जो सेना से सेवानिवृत्त हो चुके थे, बलिया के बघदूरपुर गांव में अपनी पत्नी माया देवी (44) और बेटी के साथ रह रहे थे। देश की सेवा कर चुके एक सम्माननीय नागरिक के जीवन का अंत इस कदर दुखद और हिंसक होगा, यह किसी ने सोचा भी न होगा।

कुछ दिनों पहले देवेंद्र कुमार अचानक लापता हो गए। उनकी तलाश में पुलिस जुट गई। इसी बीच, गांव के एक खेत में एक प्लास्टिक बैग मिला जिसमें मानव शरीर के कटे हुए हाथ और पैर थे। पुलिस को शक हुआ कि यह किसी जघन्य अपराध का संकेत है और उन्होंने जांच तेज कर दी।

जांच के दौरान देवेंद्र की बेटी ने अपनी मां माया देवी पर शक जताया। पुलिस ने माया देवी से पूछताछ शुरू की। पहले तो वह टालमटोल करती रही, लेकिन जब सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने सच्चाई स्वीकार कर ली।

उसने बताया कि उसका अनिल यादव नामक युवक के साथ अवैध संबंध था। जब उसके पति देवेंद्र कुमार ने इसका विरोध किया, तो माया देवी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उनकी हत्या कर दी। हत्या के बाद, पहचान छिपाने के उद्देश्य से उन्होंने देवेंद्र के शरीर को छह टुकड़ों में काट दिया — हाथ, पैर, सिर और धड़ को अलग-अलग कर रात के अंधेरे में विभिन्न स्थानों पर फेंक दिया।

इस दिल दहला देने वाले अपराध के बाद पुलिस ने माया देवी को गिरफ्तार कर लिया। वहीं फरार अनिल यादव की तलाश की जा रही थी। पुलिस ने जब बघरिखारा क्षेत्र में वाहनों की तलाशी के दौरान अनिल यादव को रोका, तो उसने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली उसके पैर में लगी और उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

यह मामला केवल हत्या का नहीं है, यह रिश्तों में गिरते नैतिक मूल्यों, स्वार्थ और संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। माया देवी चाहती तो कानूनी रूप से अलग हो सकती थी, लेकिन उसने जिस तरह की नृशंसता दिखाई, वह इंसानियत को शर्मसार करती है।

देश के लिए जीवन समर्पित करने वाले एक सैनिक की यह दुर्दशा समाज को सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। यह घटना हमें सिखाती है कि रिश्तों में संवाद, विश्वास और नैतिकता जरूरी है। समाज को ऐसे मामलों में सतर्कता और संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता है।

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