भारत की सीमा पार कर सकने वाली आकाश मिसाइल… विशेष लेख…!

आकाश मिसाइल – भारत की स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली की गौरवगाथा

हाल ही में पाकिस्तान ने भारत की सीमा के पास सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलें भेजीं, जिन्हें भारत ने सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। इस ऑपरेशन में भारत की स्वदेशी रूप से विकसित आकाश मिसाइल प्रणाली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सफलता ने वैश्विक मंच पर आकाश मिसाइल की ताकत और तकनीकी श्रेष्ठता को उजागर किया है।

आकाश मिसाइल को भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा पूरी तरह से देश में ही विकसित किया गया है। यह मिसाइल भारत की आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक का एक उज्ज्वल उदाहरण है और “मेक इन इंडिया” पहल की सफलता की प्रतीक मानी जाती है।

यह मिसाइल भारत की तीनों सेनाओं – थल सेना, वायु सेना और नौसेना में उपयोग की जा रही है। इसकी लंबाई लगभग 5.8 मीटर और वजन करीब 710 किलोग्राम है। आकाश मिसाइल की गति लगभग 4,200 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो इसे अपनी श्रेणी की सबसे तेज़ मिसाइलों में से एक बनाती है।

यह मिसाइल लगभग 18 किलोमीटर ऊँचाई तक उड़ रहे दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल या लड़ाकू विमानों को सटीकता से निशाना बना सकती है। इसकी एक खासियत यह भी है कि यह किसी भी मौसम में काम कर सकती है – चाहे अत्यधिक गर्मी हो, ठंड, बारिश या धुंध।

आकाश प्रणाली पूरी तरह से स्वचालित है, यानी इसे कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ संचालित किया जा सकता है, जिससे रिएक्शन टाइम कम होता है और कार्यकुशलता बढ़ती है। यह मिसाइल सिस्टम मोबाइल है – यानी इसे सड़क, पहाड़ी इलाकों और तटीय क्षेत्रों में आसानी से ले जाया जा सकता है।

एक और प्रमुख विशेषता है इसका मल्टी-टारगेट एंगेजमेंट सिस्टम, जिससे यह एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और नष्ट कर सकता है। हाल ही में पाकिस्तान द्वारा भेजे गए कई ड्रोन को आकाश मिसाइल प्रणाली ने एकसाथ मार गिराया, जिससे इसकी शक्ति और विश्वसनीयता सिद्ध हो गई।

कम लागत और उच्च गुणवत्ता के कारण आकाश मिसाइल को विदेशी देशों से भी मांग मिल रही है। वियतनाम, फिलीपींस, उज्बेकिस्तान जैसे कई देश इस प्रणाली को खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं, क्योंकि यह पश्चिमी मिसाइल प्रणालियों की तुलना में सस्ता और प्रभावी विकल्प है।

निष्कर्षतः, आकाश मिसाइल सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि भारत की रक्षा तकनीकी प्रगति, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रभाव का प्रतीक है। यह दिखाता है कि भारत अब केवल रक्षा आयातक नहीं, बल्कि एक सशक्त निर्यातक भी बन रहा है।

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