अज़रबैजान और तुर्की के पर्यटन प्रचार को हटाने का MakeMyTrip का फैसला – देशभक्ति की भावना को मिला समर्थन
भारत की प्रमुख ऑनलाइन ट्रैवल बुकिंग कंपनी MakeMyTrip ने हाल ही में एक अहम निर्णय लेते हुए अपनी वेबसाइट से अज़रबैजान और तुर्की जैसे देशों के पर्यटन से जुड़े सभी प्रचार और विज्ञापनों को हटा दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जारी है और इन दोनों देशों — अज़रबैजान और तुर्की — द्वारा पाकिस्तान का समर्थन किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
भारतीय सेना ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान ने भारत की सीमाओं पर हमले करने के लिए जिन ड्रोन का इस्तेमाल किया, वे तुर्की से खरीदे गए थे। यह जानकारी सामने आने के बाद देशभर में इन देशों के प्रति नाराज़गी और विरोध तेज हो गया। अज़रबैजान ने भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का समर्थन किया है, जिससे भारतीय नागरिकों में असंतोष और बढ़ गया।
इस घटनाक्रम के चलते भारतीय यात्रियों ने अज़रबैजान और तुर्की की यात्रा योजनाओं को रद्द करना शुरू कर दिया। MakeMyTrip की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इन दोनों देशों के लिए बुकिंग में 60 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि पहले से की गई बुकिंग्स को रद्द करने में 250 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।
जनता की इस भावना को समझते हुए, MakeMyTrip ने अपनी वेबसाइट से अज़रबैजान और तुर्की से संबंधित सभी यात्रा प्रचार सामग्री को हटाने का फैसला लिया है। इसमें इन देशों के लिए चल रहे डिस्काउंट पैकेज, बैनर, विज्ञापन और विशेष ऑफ़र शामिल हैं। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वे भारतीय यात्रियों द्वारा दिखाई गई देशभक्ति की भावना का पूरा समर्थन करते हैं और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए यह निर्णय लिया गया है।
MakeMyTrip का यह कदम केवल एक व्यावसायिक निर्णय नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार कॉर्पोरेट नीति का प्रतीक माना जा रहा है। आम तौर पर कंपनियाँ केवल लाभ को प्राथमिकता देती हैं, लेकिन इस निर्णय ने यह साबित किया है कि व्यावसायिक हितों के साथ-साथ राष्ट्रीय भावनाओं को भी महत्व देना जरूरी है।
सोशल मीडिया पर भी इस फैसले की खूब सराहना की जा रही है। कई लोग इसे समयानुकूल और सराहनीय कदम बता रहे हैं। यह दर्शाता है कि आज का भारतीय उपभोक्ता देशहित को प्राथमिकता देता है और उन ब्रांड्स का समर्थन करता है जो राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति जिम्मेदार हैं।
निष्कर्षतः, MakeMyTrip का यह फैसला इस बात का संकेत है कि अब कंपनियाँ भी जनता की भावनाओं और देशभक्ति की भावना को समझ रही हैं। यह कदम देश के प्रति सम्मान का प्रतीक है और एक नई दिशा की ओर इशारा करता है, जहाँ व्यापारिक निर्णय भी राष्ट्रीय नीतियों और जनभावनाओं के अनुरूप लिए जाएंगे।