पाकिस्तान का समर्थन करने पर तुर्की के खिलाफ भारत में विरोध और बहिष्कार तेज
पहलगाम में भारतीय सैनिकों पर हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंधु नामक कड़ी जवाबी कार्रवाई शुरू की। इस बीच, तुर्की द्वारा पाकिस्तान को खुला समर्थन देने से भारत में आक्रोश फैल गया और तुर्की के खिलाफ बहिष्कार की लहर शुरू हो गई।
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन ने भारत में बढ़ते विरोध की परवाह किए बिना सोशल मीडिया पर घोषणा की कि “अच्छे और बुरे समय में तुर्की पाकिस्तान के साथ खड़ा रहेगा।” यह बयान केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा — इसके तुरंत बाद तुर्की वायुसेना का C-130 सैन्य विमान पाकिस्तान में उतरा और तुर्की का एक युद्धपोत कराची बंदरगाह पर तैनात किया गया। तुर्की ने इन कार्रवाइयों को “सद्भावना मिशन” बताया, लेकिन भारत ने इसे पाकिस्तान के प्रति सैन्य समर्थन के रूप में देखा।
इतना ही नहीं, तुर्की में निर्मित SONGAR ड्रोन का उपयोग कर पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया। ये ड्रोन उच्च तकनीक से लैस हैं और सटीक निशाना साधने की क्षमता रखते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ऑपरेशन सिंधु के दौरान तुर्की के दो सैनिकों के मारे जाने की खबर भी सामने आई, जिससे तुर्की की प्रत्यक्ष भागीदारी की पुष्टि होती है।
भारत की नाराजगी इस बात से और बढ़ी कि 2023 में जब तुर्की और सीरिया में विनाशकारी भूकंप आया था, तब भारत ने ऑपरेशन दोस्त के तहत राहत सामग्री और मेडिकल टीम तुर्की भेजी थी। इसके बावजूद तुर्की ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में पाकिस्तान का साथ देना चुना।
तुर्की पाकिस्तान का पहला अंतरराष्ट्रीय समर्थक बना, जब उसने ऑपरेशन सिंधु की आलोचना की और पाकिस्तान की इस मांग का समर्थन किया कि पहलगाम हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच होनी चाहिए। इस समय खाड़ी देशों ने पाकिस्तान से दूरी बना ली है, लेकिन तुर्की उलटा रुख अपनाकर विवादों में घिर गया।
इस स्थिति में भारत में #BoycottTurkey हैशटैग ट्रेंड करने लगा। भारतीय व्यापारियों ने तुर्की से आयातित सेबों की खेप लौटा दी। भारत में संगमरमर आयात का 70% हिस्सा तुर्की से आता था, जिसे अब रोक दिया गया है। इससे तुर्की को ₹1500 करोड़ से अधिक का व्यापारिक नुकसान हुआ है।
भारतीय पर्यटकों द्वारा तुर्की यात्रा की बुकिंग में 250% की गिरावट आई है। वहीं, दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने एक तुर्की विश्वविद्यालय के साथ हुए शैक्षणिक समझौते को रद्द कर दिया है।
हालांकि इन सबके बावजूद राष्ट्रपति एर्दोआन अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि तुर्की और पाकिस्तान का संबंध राजनीति से परे एक भाईचारे का रिश्ता है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने तुर्की के इस समर्थन के लिए आभार जताया और कहा कि हर नए संघर्ष में यह संबंध और मजबूत हो रहा है।
इस तरह, जहां तुर्की और पाकिस्तान इस्लामी एकता की बात कर रहे हैं, वहीं भारत के लोगों को लगता है कि तुर्की ने भारत की दोस्ती का विश्वास तोड़ा है। अब तुर्की को भारत से राजनयिक और आर्थिक अलगाव का सामना करना पड़ रहा है, जो आगे चलकर उसके लिए बड़ा संकट बन सकता है।