पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने वाले तालिबान को विदेश मंत्री जयशंकर का धन्यवाद – भारत-अफगान रिश्तों में नया मोड़

पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने वाले तालिबान को विदेश मंत्री जयशंकर का धन्यवाद – भारत-अफगान रिश्तों में नया मोड़

जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले में 10 लोगों की जान चली गई। लेकिन इस बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष बात सामने आई — अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा की। भारत ने इस कदम का स्वागत करते हुए तालिबान को धन्यवाद दिया, जो भारत-अफगानिस्तान संबंधों में एक नए रुख की ओर संकेत करता है।

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मावलवी आमिर खान मुत्ताकी से फोन पर बातचीत की। बातचीत के बाद उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि उन्होंने तालिबान सरकार को पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने पर आभार प्रकट किया।

यह बातचीत केवल आतंकवाद तक सीमित नहीं रही। दोनों देशों ने व्यापार सहयोग, वीजा प्रक्रिया को आसान बनाना, और ईरान में स्थित रणनीतिक चाबहार बंदरगाह पर सहयोग जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया। भले ही भारत ने तालिबान शासन को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है, फिर भी मानवीय सहायता और क्षेत्रीय व्यापार को लेकर संवाद जारी है।

भारत ने बीते कुछ वर्षों में अफगान जनता के लिए खाद्यान्न, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुएं भेजी हैं। तालिबान द्वारा पहलगाम जैसे आतंकी हमले की सार्वजनिक रूप से निंदा करना यह दर्शाता है कि वे अंतरराष्ट्रीय मान्यता की ओर एक सकारात्मक छवि बनाना चाहते हैं।

भारत और अफगानिस्तान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध सदियों पुराने हैं। 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद भी भारत ने लोगों के हितों को प्राथमिकता देते हुए अपने संबंधों को पूरी तरह समाप्त नहीं किया।

जयशंकर द्वारा दिया गया वक्तव्य भारत की विदेश नीति के दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है:
“हम पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने के लिए अफगानिस्तान के आभार हैं। हमारी बातचीत में व्यापार, वीज़ा प्रक्रिया को सरल बनाना और चाबहार परियोजना में सहयोग को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई है।”

दक्षिण एशिया में बदलते राजनीतिक परिदृश्य में यह संवाद दर्शाता है कि सुरक्षा, सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए निरंतर संवाद आवश्यक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रुख ही वैश्विक शांति का आधार बन सकता है।

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