ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने चीन की PL-15 मिसाइल को सफलतापूर्वक वायु में नष्ट किया, विश्व रक्षा समुदाय में जागा बड़ा उत्साह
साल 2025 में, गुप्त भारतीय सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारत ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की जब उसने पाकिस्तान द्वारा दागी गई चीनी निर्मित PL-15E एयर-टू-एयर मिसाइल को वायु में ही मार गिराया। यह मिसाइल हमला पाकिस्तान की ओर से चीन की अत्याधुनिक लंबी दूरी की PL-15 मिसाइल के पहली बार इस्तेमाल का प्रतीक था। यह मिसाइल JF-17 लड़ाकू विमान से छोड़ी गई थी, जिसे भारत ने रूसी S-400 और स्वदेशी आकाश मिसाइल जैसे समेकित वायु रक्षा प्रणालियों की मदद से प्रभावी ढंग से नष्ट कर दिया।
यह घटना न केवल भारत की वायु रक्षा क्षमता का परिचायक है, बल्कि चीन की मिसाइल तकनीक के लिए एक बड़ा झटका भी साबित हुई है, जिससे वैश्विक सैन्य खुफिया एजेंसियों की गहरी दिलचस्पी जागी है।
PL-15 मिसाइल का परिचय:
PL-15 (पीली 15) चीन की चाइना एयरबोर्न मिसाइल अकादमी (CAMA) द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक एयर-टू-एयर मिसाइल है। इसके मुख्य विशेषताएँ हैं:
- अधिकतम परिचालन सीमा: लगभग 200 से 400 किलोमीटर।
- उड़ान की गति: मैक 4 से अधिक।
- विभिन्न चीनी लड़ाकू विमानों जैसे J-20, J-16, J-10C, J-11B और JF-17 से दागने में सक्षम।
- सक्रिय राडार होमिंग (Active Radar Homing) मार्गदर्शन तकनीक।
- अमेरिकी AIM-120D और आने वाली AIM-260 JATM जैसी मिसाइलों से मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन।
भारत की त्वरित प्रतिक्रिया:
भारत की वायु रक्षा बलों ने PL-15E मिसाइल को भेद्यता से पहले ही पहचान लिया और पंजाब के होशियारपुर के पास हवा में इसे सफलतापूर्वक मार गिराया। मिसाइल बिना विस्फोट के सुरक्षित जमीन पर गिरी, जिससे भारत को इस अत्याधुनिक चीनी मिसाइल तकनीक का गहन अध्ययन करने का दुर्लभ अवसर मिला।
वैश्विक खुफिया और Five Eyes गठबंधन:
इंटरसेप्शन के बाद, फाइव आइज़ (Five Eyes) खुफिया गठबंधन — जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड शामिल हैं — ने इस मिसाइल के अवशेषों की जांच में गहरी रुचि दिखाई है। प्रमुख जांच के क्षेत्र हैं:
- मिसाइल के राडार सीकर हेड।
- इसकी राडार सिग्नेचर और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर काउंटरमेजर्स (ECCM)।
- प्रोपल्शन सिस्टम की विशेषताएं।
- मार्गदर्शन प्रणाली और हार्डवेयर।
यह विश्लेषण चीन की वायु-से-हवा मिसाइल क्षमताओं और उनकी कमजोरियों को उजागर करेगा।
फ्रांस और जापान की दिलचस्पी:
फ्रांस और जापान जैसे देश भी PL-15E मिसाइल की गहराई से जांच करने के इच्छुक हैं। ये दोनों देश उन्नत एयर-टू-एयर मिसाइल प्रोग्राम्स में लगे हैं और चीन के वायु खतरों से निपटने के लिए अपनी तैयारी कर रहे हैं।
- फ्रांस ने भारत को राफेल विमानों के लिए मेटियोर मिसाइल उपलब्ध कराई है, जो लंबी दूरी और तेज़ गति वाली मिसाइल है।
- जापान अपनी वायु सेना को चीन के संभावित आक्रमणों से बचाने के लिए लगातार उन्नत कर रहा है।
PL-15E की तकनीकी विशेषताओं को समझना इन देशों के लिए अपनी मिसाइल रक्षा और हमले की तकनीक सुधारने में मदद करेगा।
अन्य एयर-टू-एयर मिसाइलों के साथ तुलना:
मिसाइल | देश | रेंज (किमी) | गति | विशेषताएं |
---|---|---|---|---|
PL-15E | चीन | 200–400 | मैक 4+ | लंबी दूरी, उन्नत राडार होमिंग |
AIM-120D | अमेरिका | ~160 | मैक 4 | पश्चिमी मिसाइल, व्यापक उपयोग में |
AIM-260 JATM | अमेरिका | विस्तारित | मैक 5+ | PL-15E का मुकाबला, विकासाधीन |
मेटियोर (Meteor) | फ्रांस | 200+ | मैक 4 | भारत के राफेल विमानों में प्रयोग |
R-37M | रूस | 300–400 | मैक 6 | AWACS और AEW&C जैसे बड़े लक्ष्य के लिए |
चीन और भारत के लिए रणनीतिक परिणाम:
अविस्फोटित PL-15E मिसाइल का भारत के हाथ लगना एक बड़ी खुफिया सफलता है। इससे चीन की मिसाइल तैनाती की कमजोरियां उजागर हुई हैं और भारत को भविष्य की रक्षा तकनीकों के लिए महत्वपूर्ण डेटा मिला है।
चीन के लिए यह घटना एक शर्मनाक असफलता है क्योंकि उसकी उन्नत मिसाइल तकनीक न केवल भारत के हाथ लगी बल्कि प्रभावी ढंग से नष्ट भी कर दी गई।
भारत की आगामी योजनाएं:
इस सफलता के बाद, भारत रूस की R-37M लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने पर विचार कर रहा है। साथ ही भारत का रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) अपनी अस्त्र Mk-2 और Mk-3 मिसाइल परियोजनाओं को तेज़ करने की संभावना रखता है।
ऑपरेशन सिंदूर भारत की रक्षा इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जिसने देश की क्षमता को साबित किया कि वह उच्च स्तरीय मिसाइल खतरों को सफलतापूर्वक नष्ट कर सकता है और महत्वपूर्ण तकनीकी खुफिया प्राप्त कर सकता है। इस घटना ने भारत की वैश्विक सैन्य प्रतिष्ठा को बढ़ाया और चीन के मिसाइल कार्यक्रमों को चुनौती दी।
PL-15E मिसाइल का पूर्णतया सुरक्षित पुनः प्राप्त होना भारत और उसके सहयोगियों के लिए एक अनमोल अवसर है, जो आने वाले वर्षों में वायु युद्ध रणनीतियों को आकार देने में मदद करेगा।