सिंदूर मिटाने आए थे, ज़मीन में गाड़ दिए गए” – प्रधानमंत्री मोदी का आक्रोशपूर्ण भाषण
भारत आज विकास, सुरक्षा और राष्ट्रीय स्वाभिमान के रास्ते पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इसका एक शक्तिशाली उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की राजस्थान यात्रा रही, जहां उन्होंने एक ओर विकास परियोजनाओं की शुरुआत की, तो दूसरी ओर एक ऐसा जोशीला भाषण दिया, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
करणी माता मंदिर में आस्था का दर्शन
22 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान के बीकानेर जिले में ₹26,000 करोड़ की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने पहुँचे। अपनी यात्रा की शुरुआत में उन्होंने देशनोक में स्थित प्रसिद्ध करणी माता मंदिर में सुबह 10:30 बजे पूजा-अर्चना की।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा उनके साथ थे। प्रधानमंत्री की आगमन पर मंदिर में विशेष पूजाएं आयोजित की गईं और सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए। यह यात्रा विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री की पहली करणी माता मंदिर यात्रा थी।
विकास की सौगात – रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों का लोकार्पण
मंदिर दर्शन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने देशनोक रेलवे स्टेशन का पुनर्निर्माण कार्य राष्ट्र को समर्पित किया और बीकानेर-मुंबई एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इसके बाद वह सड़क मार्ग से आठ किलोमीटर दूर बालाना गांव पहुंचे और वहां एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस जनसभा में एक लाख से अधिक लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए भव्य इंतज़ाम किए गए थे।
तेज़ रफ्तार भारत की झलक
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि भारत में आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए ऐतिहासिक स्तर पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा:
- “वंदे भारत, अमृत भारत और नमो भारत जैसी रेलगाड़ियाँ देश की प्रगति और गति का प्रतीक हैं।”
- “1300 से अधिक रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण हो चुका है।”
- “100 से ज्यादा अमृत भारत स्टेशन अब तैयार हैं।”
- “अमानवीय रेलवे क्रॉसिंग की समस्या अब अतीत की बात हो गई है।”
पहल्गाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर
अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के पहल्गाम में हुए आतंकी हमले का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कैसे आतंकियों ने एक दंपति पर हमला किया, महिला के माथे से सिंदूर जबरन मिटा दिया और धर्म पूछा।
प्रधानमंत्री ने भावुक स्वर में कहा:
“पहल्गाम में जब हमारी एक बहन के माथे से उसका सिंदूर मिटाया गया, तो 140 करोड़ भारतीयों ने वह पीड़ा महसूस की। उस सिंदूर को मिटाने वालों को ऐसी सज़ा दी गई जो वे सपने में भी नहीं सोच सकते थे।”
उन्होंने कहा कि सरकार ने सेना को पूरी छूट दी और हमारी तीनों सेनाओं ने मिलकर आतंकियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया।
“ज़मीन में गाड़ दिए गए वे लोग…” – मोदी का बयान
प्रधानमंत्री ने तीखे शब्दों में कहा:
“सिंदूर मिटाने निकले थे, ज़मीन में गाड़ दिए गए। जिन्होंने भारत की धरती पर खून बहाया, उनके एक-एक का हिसाब चुकता कर दिया गया।”
उन्होंने आगे कहा:
“जो सोचते थे कि भारत शांति से सहता रहेगा, वे आज अपने घरों में छुपे बैठे हैं। जिनका घमंड उनके हथियारों पर था, वे आज उन्हीं हथियारों के मलबे में दफन हो गए हैं।”
यह बयान ना केवल आतंकवाद के खिलाफ एक सख्त चेतावनी था, बल्कि भारत की नई सैन्य नीति – तत्काल और निर्णायक कार्रवाई – को भी रेखांकित करता है।
सिंदूर – सिर्फ श्रृंगार नहीं, संस्कार का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि एक महिला के माथे का सिंदूर सिर्फ उसकी पहचान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और सम्मान का प्रतीक है। उसे मिटाना पूरे समाज के सम्मान पर हमला है। इसलिए आतंकियों को सिर्फ जवाब नहीं, ऐसा जवाब मिला जो आने वाले समय में सबके लिए चेतावनी रहेगा।
विकास, रक्षा और श्रद्धा – मोदी की त्रिवेणी रणनीति
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा ने तीन मुख्य बातों को उजागर किया:
- विकास – रेलवे, ट्रेनों और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के माध्यम से।
- रक्षा – ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से आतंक के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
- श्रद्धा – करणी माता मंदिर में दर्शन कर भारत की संस्कृति को नमन।
यह त्रिवेणी रणनीति मोदी की कार्यशैली को दर्शाती है – एक ऐसा नेता जो विकास भी करता है, परंपरा से भी जुड़ा है और देश की रक्षा में भी अडिग है।
राजनीतिक और राष्ट्रीय प्रभाव
प्रधानमंत्री का यह भाषण न केवल आम जनता को संबोधित था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक स्पष्ट संदेश था – भारत अब चुप नहीं रहेगा। भारत अब केवल कूटनीति के भरोसे नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर सीधी कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा।
उनका यह बयान कि “सिंदूर मिटाने आए थे, ज़मीन में गाड़ दिए गए” आने वाले समय में भारत की आत्मरक्षा की नीति का प्रतीक वाक्य बन सकता है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बीकानेर में दिया गया भाषण केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था। यह भारत की नई आत्मा का परिचय था – एक ऐसा भारत जो श्रद्धालु है, पर डरता नहीं; एक ऐसा भारत जो विकास चाहता है, पर अपमान नहीं सहता।
ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया कि भारत अब किसी भी आतंकवादी हमले का जवाब शब्दों से नहीं, कार्यों से देता है। और जब बात महिला सम्मान और सांस्कृतिक प्रतीकों की हो, तो भारत की प्रतिक्रिया निर्णायक और तीव्र होगी।