ऑपरेशन सिंदूर के बाद: पाकिस्तान के खिलाफ भारत की कूटनीतिक मुहिम तेज
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ एक सशक्त कूटनीतिक मोर्चा खोल दिया है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों पर हुए बर्बर आतंकी हमले के बाद भारत ने यह कदम उठाया। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बदलती विदेश नीति को दर्शाता है, जो अब पारंपरिक ‘गुटनिरपेक्ष’ नीति से हटकर एक बहु-संरेखित (multi-alignment) दृष्टिकोण की ओर बढ़ चुकी है।
गुटनिरपेक्ष से बहुपक्षीय रणनीति तक: भारत की विदेश नीति में बदलाव
भारत की विदेश नीति की नींव गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) पर रखी गई थी, जिसे पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने स्थापित किया था। दशकों तक भारत ने इस नीति का पालन किया। लेकिन 2016 में, प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार NAM सम्मेलन में भाग नहीं लिया — यह एक स्पष्ट संकेत था कि भारत अब अपनी विदेश नीति में लचीलापन और आत्मविश्वास लाना चाहता है।
अब भारत की नीति यह है कि वह सभी देशों के साथ हितों के आधार पर दोस्ती बनाएगा, और जहां भारत के हितों पर आघात होगा, वहां निर्भीक प्रतिक्रिया देगा।
पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर
22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकियों ने गोलीबारी की, जिसमें 26 निर्दोष लोग, जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था, मारे गए। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाया और कार्रवाई की माँग की। पाकिस्तान ने कोई जवाब नहीं दिया।
हमले के 16वें दिन, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर नामक सैन्य कार्रवाई शुरू की। इस कार्रवाई में:
- 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया,
- पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के आतंकवादी शिविरों को नष्ट किया गया,
- पाकिस्तान के 11 प्रमुख एयरबेस (नूर खान, चकलाला, सियालकोट, मुरिदके आदि) पर हमला किया गया,
- भारत की वायुसेना ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोककर जवाबी हमला किया।
भारतीय हमलों के आगे टिक न पाने के कारण, पाकिस्तान को युद्धविराम की गुहार लगानी पड़ी और भारत ने अपनी कार्रवाई को स्थगित कर दिया। यह चौथी बार था जब पाकिस्तान भारत के सामने युद्ध में हार गया।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की शुरुआत
ऑपरेशन के बाद भारत सरकार ने सभी राजनीतिक दलों को जानकारी दी और एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक अभियान शुरू किया। इसके तहत:
- सांसदों की बहुदलीय टीमें बनाई गईं (हर टीम में 6 सांसद और विदेश मंत्रालय का एक प्रतिनिधि),
- ये टीमें 30 देशों जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, कतर, यूएई, सऊदी अरब आदि में जाकर भारत की स्थिति और आतंकवाद पर दृष्टिकोण को स्पष्ट करेंगी,
- इस अभियान का समन्वय केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू कर रहे हैं।
यह प्रयास सीमापार आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाने के लिए उठाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: भारत को समर्थन
भारत की इस पहल को दुनिया भर में समर्थन मिला है। अमेरिका, यूरोपीय संघ, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने भारत के साथ एकजुटता जताई और पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद की निंदा की।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी अपने बयान में कहा कि कोई भी देश आतंकवाद को समर्थन या आश्रय न दे, जो भारत के रुख को समर्थन देने जैसा ही था।
भारत की भूमिका बदलती वैश्विक व्यवस्था में
आज का भारत एक निर्णायक शक्ति बनकर उभर रहा है। भारत की कार्रवाई न सिर्फ सैन्य रूप से मजबूत रही बल्कि कूटनीतिक रूप से भी प्रभावशाली रही।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भारत तेजी से उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में अपने स्वस्थ, शांतिपूर्ण, परंतु सशक्त छवि को स्थापित कर रहा है।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर न केवल एक सैन्य अभियान था बल्कि यह भारत की नई विदेश नीति और रणनीतिक सोच का भी प्रतीक बन गया है। सैन्य साहस और कूटनीतिक कौशल के संयोजन से भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि:
“भारत पर हमला करने वालों को माफ नहीं किया जाएगा, और भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।”