मधुमक्खियों की रक्षा करना – हमारी कृषि और भविष्य की पीढ़ियों की सुरक्षा
मधुमक्खियाँ हमारे पारिस्थितिक तंत्र की सबसे आवश्यक जीवों में से एक हैं। ये छोटे-से कीट परागण (pollination) की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिसमें फूलों के पराग को एक फूल से दूसरे फूल तक पहुँचाया जाता है। यही प्रक्रिया पौधों की प्रजनन और फसलों की उपज के लिए आवश्यक होती है। इस कारण, मधुमक्खियाँ हमारी कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 122वें संस्करण में इसी मुद्दे को उठाया। उन्होंने पुणे के एक युवक “अमित” की प्रेरणादायक कहानी साझा की। अमित ने देखा कि उनके आवासीय परिसर में एक मधुमक्खी का छत्ता हटाया जा रहा है। उन्होंने सोचा कि इन मधुमक्खियों की रक्षा करनी चाहिए और इसके लिए उन्होंने कदम उठाया। उन्होंने मधुमक्खियों के बारे में अध्ययन किया और “मधुमक्खियों के मित्र” नाम से एक समूह बनाया, जो अब छत्तों को सुरक्षित तरीके से एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करता है।
इस पहल से न केवल मधुमक्खियाँ सुरक्षित रहती हैं, बल्कि इंसानों को भी कोई नुकसान नहीं पहुँचता। प्रधानमंत्री मोदी ने इस उदाहरण के माध्यम से यह संदेश दिया कि मधुमक्खियों की रक्षा केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं है, बल्कि यह हमारी कृषि और भविष्य की पीढ़ियों की भी रक्षा है। यह संदेश और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस मनाया जाता है।
विश्व स्तर पर 75% से अधिक खाद्य फसलें परागण पर निर्भर करती हैं। यदि मधुमक्खियाँ समाप्त हो जाएँ, तो फलों, सब्जियों और अनाज की पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे खाद्य संकट और जैव विविधता को खतरा उत्पन्न होगा। इसलिए, मधुमक्खियों की रक्षा करना सिर्फ एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि भारत में पिछले 10-11 वर्षों में शहद उत्पादन में 60% की वृद्धि हुई है। पहले जहाँ सालाना 75,000 टन शहद का उत्पादन होता था, अब यह 1.25 लाख टन तक पहुँच चुका है। इसका कारण मधुमक्खी पालन (Beekeeping) को बढ़ावा देना और किसानों को इसके लिए प्रशिक्षित करना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय का एक नया साधन बना है।
निष्कर्ष:
मधुमक्खियाँ हमारे पर्यावरण और भोजन की सुरक्षा में हमारी रक्षा करती हैं। अब समय आ गया है कि हम भी उनकी रक्षा करें। छोटी-छोटी कोशिशें जैसे – मधुमक्खियों के छत्तों को बिना वजह नष्ट न करना, और विशेषज्ञों की मदद लेना – हमारे पर्यावरण के लिए बड़ा योगदान बन सकती हैं। मधुमक्खियों को बचाकर हम आने वाले कल को सुरक्षित बना सकते हैं।