आतंकवाद की वैश्विक राजधानी पाकिस्तान को अलग-थलग करने की भारत की रणनीतिक चालें

आतंकवाद की वैश्विक राजधानी पाकिस्तान को अलग-थलग करने की भारत की रणनीतिक चालें

21वीं सदी में वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा आतंकवाद है। इस आतंकवाद को आश्रय और समर्थन देने वाले देशों में पाकिस्तान एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। इस पृष्ठभूमि में, भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने और उसके आतंकवाद समर्थक चेहरे को उजागर करने के लिए राजनयिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर सक्रिय कदम उठाए हैं

आतंकवाद के खिलाफ भारत की “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू की गई ऑपरेशन सिंधूर जैसी सैन्य कार्रवाइयाँ इस नई रणनीति का स्पष्ट उदाहरण हैं। इन सैन्य कदमों के साथ-साथ भारत ने एक मजबूत कूटनीतिक अभियान भी छेड़ा है, जिससे पाकिस्तान की आतंकवाद के प्रति सहानुभूति को वैश्विक मंचों पर उजागर किया जा सके।

वैश्विक मंच पर एकजुट भारत

इतिहास में पहली बार, भारत के 59 सांसदों को दुनिया के 33 देशों में भेजा गया है, जिसमें यूरोपीय संघ के मुख्यालय भी शामिल हैं। इस दल में 31 सांसद सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से हैं, जबकि 30 सांसद विपक्षी दलों से हैं। इनका मकसद दुनिया को पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों और भारत के कड़े रुख से अवगत कराना है।

इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं – भाजपा के बैजयंत जय पांडा और रविशंकर प्रसाद, कांग्रेस के शशि थरूर, द्रमुक की कनीमोझी करुणानिधि, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले, और शिवसेना के श्रीकांत शिंदे

राजनीति से परे राष्ट्र सर्वोपरि

राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, सभी दलों ने राष्ट्र की सुरक्षा के मुद्दे पर एकजुटता दिखाई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि भारत में कोई भी राजनीतिक दल राष्ट्र की सुरक्षा पर समझौता नहीं करेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “हिंदू, मुस्लिम या ईसाई – धर्म कोई भी हो, लेकिन राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है। हम भाजपा की विचारधारा से असहमत हो सकते हैं, लेकिन पहलगाम हमले के बाद शुरू किए गए ऑपरेशन सिंधूर जैसे कदमों का समर्थन करना और देश के लिए बोलना हमारी जिम्मेदारी है।”

शशि थरूर की वैश्विक अपील

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंधूर को सही समय पर उठाया गया रणनीतिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत आतंकवाद को सटीक और चतुराई भरे हमलों से जवाब दे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 9/11 के हमले में 2,731 लोगों की जान गई थी, और उस हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने शरण दी थी।

थरूर ने कहा, “भारत जहां वैश्विक मूल्यों – शांति, लोकतंत्र, स्वतंत्रता – की रक्षा करता है, वहीं पाकिस्तान नफरत, हिंसा और आतंकवाद को बढ़ावा देता है।”

बार-बार आतंकी हमले – पाकिस्तान की भूमिका साफ

अभिषेक बनर्जी ने 9/11, मुंबई (26/11), उरी, पुलवामा, और पहलगाम जैसे हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि यह सब पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को बढ़ावा देने का सबूत है। उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान को दिया गया कोई भी समर्थन, आतंकवाद को समर्थन देने जैसा है

कनीमोझी का कड़ा आरोप

कनीमोझी (DMK) ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक, सभी ने पाकिस्तान के साथ रिश्तों को सुधारने की कोशिश की। लेकिन हर बार, पाकिस्तान ने जवाब में भारत पर आतंकवादी हमले किए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, भारत में धार्मिक नफरत फैलाने की साजिश करता है।

ऑपरेशन सिंधूर – एक रणनीतिक बदलाव

शिवसेना के श्रीकांत शिंदे ने कहा कि ऑपरेशन सिंधूर केवल एक जवाबी हमला नहीं, बल्कि भारत की सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव है। भारत अब केवल सहनशील नहीं, बल्कि सटीक रूप से आतंकी ठिकानों को निशाना बना रहा है

भारत बनाम पाकिस्तान – दो विपरीत छवि

भारत आज शांति, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और स्वतंत्रता का रक्षक है, जबकि पाकिस्तान घृणा, धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद का केंद्र बन चुका है। यह अंतर अब वैश्विक स्तर पर साफ नजर आ रहा है।

शशि थरूर के शब्दों में:

“भारत वैश्विक मूल्यों की रक्षा करता है, पाकिस्तान उन्हें नष्ट करता है।”

भारत के कूटनीतिक प्रयासों का असर

भारत की समन्वित और योजनाबद्ध कूटनीति ने पाकिस्तान को धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग करना शुरू कर दिया है। इन सांसदों की यात्राओं से अब दुनिया के कई देश पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता, रक्षा साझेदारी और कूटनीतिक संबंधों पर पुनर्विचार कर रहे हैं।

इन प्रयासों से भविष्य में निम्नलिखित परिणाम सामने आ सकते हैं:

  • पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध
  • आतंकवाद प्रायोजित राष्ट्र घोषित करना
  • सैन्य सहायता का बंद होना
  • संयुक्त राष्ट्र, G20, FATF जैसी संस्थाओं में भारत के पक्ष को समर्थन मिलना

निष्कर्ष

पाकिस्तान, जो अब भी आतंकवाद की जननी बना हुआ है, भारत की ठोस कूटनीति और राष्ट्रीय एकता के चलते वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ता जा रहा है। भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है, और इसके खिलाफ लड़ाई में भारत मजबूती और एकता के साथ आगे बढ़ रहा है।

ऑपरेशन सिंधूर, सांसदों का वैश्विक दौरा, और देश की राजनीतिक एकता यह सब दिखाता है कि भारत अब सिर्फ अपनी सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को सुरक्षित रखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है

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