नया पंजीकरण विधेयक 2024: संपत्ति रजिस्ट्रेशन के लिए आधार अब अनिवार्य नहीं
भारत में भूमि और संपत्ति लेन-देन का कानूनी पंजीकरण आवश्यक होता है ताकि मालिकाना हक स्पष्ट हो और भविष्य में कोई विवाद न हो। अब तक यह प्रक्रिया 1908 के पंजीकरण अधिनियम (Registration Act, 1908) के तहत संचालित होती रही है। लेकिन 100 से अधिक वर्षों के बाद, समाज और तकनीक में हुए बदलावों को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने एक नया पंजीकरण विधेयक (Draft Registration Bill) प्रस्तावित किया है।
यह विधेयक ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भूमि संसाधन विभाग (Department of Land Resources) द्वारा तैयार किया गया है और फिलहाल सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया गया है।
प्रमुख विशेषताएँ
1. आधार नंबर अब अनिवार्य नहीं
नए मसौदे की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संपत्ति के पंजीकरण के लिए आधार नंबर अनिवार्य नहीं रहेगा। अभी तक पहचान प्रमाण के रूप में आधार कार्ड का उपयोग सामान्य रूप से होता रहा है, लेकिन अब यह केवल वैकल्पिक होगा।
इसका अर्थ है कि जिन लोगों के पास आधार नहीं है या जो अपनी गोपनीयता बनाए रखना चाहते हैं, वे अन्य वैकल्पिक पहचान प्रमाण के माध्यम से संपत्ति पंजीकरण करवा सकेंगे।
यह कदम निजता (Privacy) के अधिकार को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
2. अस्वीकृति पर लिखित कारण देना होगा
यदि कोई पंजीकरण अधिकारी दस्तावेज़ को पंजीकृत करने से मना करता है, तो उसे अब उसके स्पष्ट और लिखित कारण देने होंगे।
साथ ही, दस्तावेज़ प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति को उस फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार मिलेगा। यह पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
3. ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन
डिजिटल इंडिया के युग में, यह विधेयक नागरिकों को दस्तावेज़ पंजीकरण के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प प्रदान करता है।
हालाँकि, अगर दस्तावेज़ ऑनलाइन जमा किए जाते हैं, तो अंतिम पंजीकरण से पहले संबंधित व्यक्ति को पंजीकरण अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य होगा। यह फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एक आवश्यक सुरक्षा उपाय है।
4. पहचान सत्यापन के लिए वैकल्पिक तरीके
पहचान प्रमाण के रूप में अब केवल फोटोग्राफ और अंगूठे का निशान ही नहीं, बल्कि निम्नलिखित विकल्प भी मान्य होंगे:
- रंगीन फोटो
- डिजिटल कैमरे से खींची गई फोटो
- हस्ताक्षर (Signature)
- बॉयोमेट्रिक उपकरणों से प्राप्त विवरण
साथ ही, पैन कार्ड (PAN) संख्या को भी अनिवार्य किया गया है, जिससे आयकर विभाग और संपत्ति लेन-देन के बीच समन्वय स्थापित होगा।
5. सरल भाषा में दस्तावेज़ तैयार करना
नए विधेयक में यह सुझाव भी दिया गया है कि पंजीकरण के दस्तावेज़ सरल और स्पष्ट भाषा में तैयार किए जाएँ ताकि आम नागरिक, विशेषकर ग्रामीण और अल्प-शिक्षित लोग, उसे समझ सकें और वकीलों पर निर्भर न रहें।
6. पंजीकरण विभाग की नई संरचना
नए विधेयक में पंजीकरण विभाग की प्रशासनिक संरचना को भी पुनः परिभाषित किया गया है, जिसमें शामिल हैं:
- पंजीकरण महानिदेशक (Registrar General)
- अतिरिक्त पंजीयक (Additional Registrar)
- उप पंजीयक (Deputy Registrar)
- सहायक पंजीयक (Sub-Registrar)
इसके अलावा, विभाग में नियुक्तियों और रिक्त पदों की पूर्ति के लिए नियम भी प्रस्तावित किए गए हैं।
7. आधुनिक तकनीक का समावेश
इस विधेयक में कंप्यूटर, स्कैनर, क्लाउड स्टोरेज और अन्य डिजिटल उपकरणों के उपयोग की अनुमति दी गई है। इससे दस्तावेज़ों की सुरक्षा, संग्रहण और त्वरित पहुँच सुनिश्चित की जा सकेगी।
नागरिकों को मिलने वाले लाभ
- आधार का विकल्प होने से निजता और व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा होगी।
- ऑनलाइन प्रक्रिया से समय और पैसे की बचत होगी।
- अस्वीकृति के खिलाफ अपील की सुविधा न्यायसंगत प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी।
- सरल भाषा में दस्तावेज़ आम नागरिकों को सक्षम बनाएँगे।
- पैन लिंकिंग से कालेधन पर लगाम लगेगी।
- डिजिटल प्रक्रिया से फर्जी दस्तावेज़ या जालसाजी रोकी जा सकेगी।
यह सुधार क्यों जरूरी है?
1908 का कानून आज के संदर्भ में अप्रासंगिक हो चुका है। आज की समस्याएँ जैसे—जमीन की धोखाधड़ी, फर्जी पहचान, कागजात की हेराफेरी—इनसे निपटने के लिए एक आधुनिक, तकनीकी और पारदर्शी प्रणाली की आवश्यकता है।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि आधार को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता, जिससे यह विधेयक संवैधानिक दृष्टि से भी सही है।
निष्कर्ष
मध्य सरकार का यह नया विधेयक पंजीकरण प्रणाली में आधुनिकीकरण, नागरिक अधिकारों की रक्षा और तकनीक का समावेश करते हुए व्यापक सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
आधार को ऐच्छिक बनाना, डिजिटल सेवाओं का विस्तार, अपील का अधिकार, और सरल प्रक्रिया—ये सभी प्रावधान भारत के आम नागरिक को अधिक सशक्त और सुरक्षित बनाएँगे।
यदि सही तरीके से लागू किया गया, तो यह विधेयक न केवल भूमि और संपत्ति पंजीकरण को आसान बनाएगा, बल्कि न्याय और पारदर्शिता का नया मानक भी स्थापित करेगा।