अरुणाचल प्रदेश में भूस्खलन से 7 लोगों की मौत, उत्तर-पूर्वी राज्यों में मूसलधार बारिश से जनजीवन प्रभावित
गुरुवार से उत्तर-पूर्वी भारत के अधिकांश राज्यों में मूसलधार बारिश हो रही है, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट कमेंग जिले में भारी बारिश के कारण एक भीषण भूस्खलन हुआ, जिसमें दो महिलाओं और दो बच्चों समेत कुल सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
यह हादसा नेशनल हाईवे-13 के बना-सिप्पा मार्ग पर हुआ। गुरुवार रात को एक वाहन सिप्पा की ओर जा रहा था, तभी अचानक हुए भूस्खलन के कारण वह गाड़ी खाई में जा गिरी। सभी सात लोग, जो एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं, मौके पर ही मारे गए।
घटना की जानकारी मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा। भारी बारिश और पथरीली ज़मीन की कठिनाइयों के बावजूद शवों को बाहर निकाला गया। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों के प्रति शोक व्यक्त किया है और सहायता राशि देने की घोषणा की है।
राज्य भर में स्थिति गंभीर
अरुणाचल प्रदेश में बारिश से कई जिलों में सड़क संपर्क टूट गया है। कई मुख्य मार्ग पानी और मलबे से बंद हो गए हैं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। सार्वजनिक परिवहन सेवाएं रोक दी गई हैं और कई स्कूल-कॉलेजों को एहतियातन बंद कर दिया गया है।
उत्तर-पूर्व के अन्य राज्यों में भी असर
यह स्थिति केवल अरुणाचल तक सीमित नहीं है। असम, मेघालय, मणिपुर और नागालैंड जैसे पड़ोसी राज्यों में भी लगातार भारी बारिश हो रही है। असम के कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया है और नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा है।
मेघालय में पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। मणिपुर में भी कुछ सड़कों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इन राज्यों की आपदा प्रबंधन टीमें पूरी सतर्कता में हैं।
सरकारी चेतावनियां और कार्रवाई
भारतीय मौसम विभाग (IMD) और भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने इन राज्यों में और भूस्खलन की चेतावनी दी है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
अरुणाचल प्रदेश सरकार ने आपदा राहत दलों को हाई अलर्ट पर रखा है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेज़ कर दिए हैं। कुछ संवेदनशील इलाकों में लोगों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
सामुदायिक भागीदारी और राहत कार्य
स्थानीय स्वयंसेवी संगठन और सामुदायिक समूह राहत कार्यों में सरकार की मदद कर रहे हैं। प्रभावित परिवारों को भोजन, कपड़े और दवाइयाँ वितरित की जा रही हैं। स्कूलों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं।
यह दुखद घटना हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि प्रकृति की ताकत के आगे हम कितने असहाय हो सकते हैं, और आपदा के समय तैयार रहना कितना जरूरी है।