इस साल जनवरी से अब तक तेलंगाना पुलिस के सामने 355 नक्सली सरेंडर हुए
तेलंगाना में वर्षों से चल रही नक्सल समस्या को नियंत्रित करने में बड़ी प्रगति हुई है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी 2025 से अब तक कुल 355 नक्सली तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इनमें से 68 नक्सली केवल मुलुगु जिले में ही आत्मसमर्पण किए हैं, जो इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।
मुलुगु जिला तेलंगाना का एक संवेदनशील क्षेत्र रहा है, जहाँ पिछले कुछ वर्षों से नक्सल गतिविधियां तीव्र हैं। लेकिन मुलुगु जिले के पुलिस अधीक्षक साबरिश के नेतृत्व में आज मराठी और छत्तीसगढ़ से आए आठ माओवादी हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह घटना पुलिस की कड़ी मेहनत और सरकार द्वारा चलाई जा रही पुनर्वास योजनाओं के सफल समन्वय का परिणाम है।
इन नक्सलियों ने सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानने के बाद नक्सली रास्ता छोड़कर अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन बिताने का फैसला किया है। सरकार द्वारा प्रदान की गई पुनर्वास योजनाएं पूर्व नक्सलियों को समाज में फिर से समायोजित करने और नई ज़िन्दगी शुरू करने का अवसर देती हैं।
नक्सलवादी आंदोलन भारत के कई हिस्सों में सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है, विशेषकर तेलंगाना और छत्तीसगढ़ जैसे सीमा क्षेत्र में। हथियारबंद होकर ये नक्सली स्थानीय जनता की ज़िंदगी को बाधित करते रहे हैं, और अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए हिंसक तरीकों का सहारा लेते रहे हैं। इसके कारण गाँवों में रहने वाले लोग हमेशा भय और असुरक्षा की स्थिति में थे।
तेलंगाना पुलिस की नई रणनीति और सरकार की सामाजिक कल्याण योजनाओं के कारण नक्सलियों के मन में परिवर्तन आया है। पुलिस ने स्थानीय लोगों को नक्सलियों के साथ सहयोग न करने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसी सामुदायिक सहयोग की वजह से नक्सल आंदोलन पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा रहा है।
इस वर्ष की शुरुआत से अब तक 355 नक्सलियों का आत्मसमर्पण नक्सली समस्या को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी सफलता है। पुलिस विभाग इसे जनता की सुरक्षा और क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानता है।
सरकार ने पुनर्वास और विकास योजनाओं को तब तक जारी रखने का आश्वासन दिया है जब तक कि नक्सली खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। मुलुगु जिले में मिली यह सफलता अन्य प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी उम्मीद की किरण है।
यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि तेलंगाना और उसके आस-पास के राज्यों में जल्द ही शांति स्थापित होगी। कठोर कानून प्रवर्तन और सामाजिक-आर्थिक सहायता का यह संयोजन नक्सली गतिविधियों को कमजोर करने में कारगर साबित हुआ है। सरकार, पुलिस और जनता के संयुक्त प्रयासों से नक्सली समस्या का समाधान संभव है।
आख़िरकार, हथियार बंद नक्सलियों का समाज में वापस आना, शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। यह उदाहरण भी पेश करता है कि धैर्यपूर्वक और समन्वित प्रयासों से भारत में जटिल सुरक्षा चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है।