भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ अपनी दृढ़ नीति का स्पष्ट प्रदर्शन किया है: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन: भारत की एकता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक ऐतिहासिक कार्यक्रम में भाग लिया, जहाँ उन्होंने भारत की सामाजिक एकता और आतंकवाद के खिलाफ कड़े रुख को दोहराया। यह कार्यक्रम श्री नारायण गुरु और महात्मा गांधी की ऐतिहासिक मुलाकात की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि, “100 वर्ष पहले हुई यह ऐतिहासिक भेंट आज भी हमें प्रेरणा देती है।” उन्होंने बताया कि श्री नारायण गुरु की शिक्षाएँ आज भी मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर सभी के लिए समानता, एकता और आध्यात्मिकता का संदेश दिया।

मोदी ने कहा कि श्री नारायण गुरु का दर्शन ‘एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर – मानवता के लिए’ आज के भारत के लिए उतना ही प्रासंगिक है जितना वह उस समय था। उनके विचार समाज सुधारकों, सेवकों और आध्यात्मिक पथ पर चलने वालों के लिए आज भी मार्गदर्शक हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत ने जब-जब कठिनाइयों का सामना किया है, तब-तब देश के किसी कोने से ऐसे महान व्यक्तित्व उभरे हैं जिन्होंने या तो समाज सुधार का बीड़ा उठाया या आध्यात्मिक जागरण का। उन्होंने कहा कि ये हमारे देश की आत्मा की शक्ति को दर्शाते हैं।

अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में किए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी अडिग नीति को विश्व के सामने स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है।

यह सैन्य अभियान यह दर्शाता है कि भारत आज आतंकवाद से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है — चाहे वह रणनीतिक हो, तकनीकी हो या राजनीतिक। भारत ने यह भी दिखा दिया है कि वह न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम है, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता के लिए भी प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री का यह संबोधन दो प्रमुख संदेश देता है: पहला, भारत की सामाजिक और आध्यात्मिक विरासत का सम्मान और संरक्षण, और दूसरा, राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अडिग प्रतिबद्धता। यह भाषण भारत के अतीत की विरासत और वर्तमान की शक्ति, दोनों को जोड़ने वाला सेतु बना।

अंततः, प्रधानमंत्री मोदी का यह भाषण भारत के लिए एक समरस, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की दिशा में स्पष्ट दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है – जहाँ भारत अपने आध्यात्मिक मूल्यों के साथ-साथ आधुनिक वैश्विक चुनौतियों का भी दृढ़ता से सामना कर रहा है।

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