समय सीमा नहीं, भारत का हित सर्वोपरि: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

समय सीमा नहीं, भारत का हित सर्वोपरि: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

नई दिल्ली, 5 जुलाई 2025:
भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर उठते सवालों के बीच, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी व्यापारिक करार में राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखेगा, ना कि किसी कृत्रिम समय सीमा या विदेशी दबाव को।

उनकी यह टिप्पणी उस वक्त आई है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच एक बहुत बड़ा व्यापार समझौता जल्द ही हस्ताक्षरित होने वाला है।

इसके जवाब में पीयूष गोयल ने कहा:

“हम किसी तय समय सीमा या बाहरी दबाव के तहत व्यापार समझौता नहीं करेंगे। हमारी प्राथमिकता है कि ऐसा समझौता हो जो भारत के किसानों, छोटे व्यवसायों, श्रमिकों और घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा करे।

उन्होंने कहा कि भारत व्यापक और संतुलित व्यापार समझौतों के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन वह तभी स्वीकार्य होगा जब वह पारस्परिक लाभकारी, निष्पक्ष और संतुलित हो।

“हम मुक्त व्यापार के विरोधी नहीं हैं, लेकिन हमारा रुख हमेशा न्यायसंगत व्यापार (Fair Trade) का रहा है,” उन्होंने जोड़ा।

गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक व्यापार वार्ताओं में सक्रिय भागीदारी करता रहा है और भविष्य में भी करेगा, लेकिन कोई भी समझौता भारत की आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं की अनदेखी करके नहीं होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत जल्दबाज़ी में कोई भी निर्णय नहीं करेगा।

“हम बेहतर गुणवत्ता वाला समझौता चाहते हैं, भले ही उसके लिए समय लगे। हमें ऐसे सौदे की जरूरत नहीं जो केवल दिखावे के लिए हो।”

केंद्रीय मंत्री ने यह संकेत दिया कि भारत विकसित देशों के साथ रणनीतिक और दीर्घकालिक साझेदारी के पक्ष में है, लेकिन उसकी शर्तें भारत के हितों के अनुरूप होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि कोई भी मुक्त व्यापार समझौता तभी टिकाऊ और व्यावहारिक होगा जब वह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हो और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच संतुलन बनाए रखे।


निष्कर्ष:

पीयूष गोयल के बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर एक आत्मविश्वासी और स्वाभिमानी राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, जो अपने आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के लिए तैयार है।

भारत की व्यापार नीति अब केवल संख्याओं या निवेश के इर्द-गिर्द नहीं घूमती, बल्कि यह सुनिश्चित करती है कि हर समझौता देश के नागरिकों की समृद्धि, स्वदेशी उद्योग की सुरक्षा और दीर्घकालिक विकास में सहायक हो।

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