तमिलनाडु में अवैध विदेशी नागरिकों पर सख्ती: सुरक्षा और कानून व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम
हाल ही में कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार ने देश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ निगरानी और कार्रवाई को तेज कर दिया है। इस सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे अपने-अपने राज्यों में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों की पहचान करें और उन्हें उनके देश वापस भेजने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें।
इन निर्देशों के बाद, तमिलनाडु सरकार ने भी इस दिशा में व्यापक कदम उठाना शुरू कर दिया है। राज्य के चेन्नई, कोयंबटूर, ईरोड और तिरुप्पूर जिलों में बांग्लादेश, म्यांमार और नाइजीरिया जैसे देशों के नागरिकों के फर्जी दस्तावेजों के सहारे रहने की खबरें सामने आई हैं। इनमें से कुछ के खिलाफ नशीली दवाओं की तस्करी, फर्जी दस्तावेज बनवाना, और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप भी लगे हैं।
तमिलनाडु में अवैध विदेशी नागरिकों की मौजूदगी
खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के कई जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे विदेशी नागरिक रह रहे हैं जो वैध वीज़ा या पासपोर्ट के बिना भारत में दाखिल हुए हैं। इनमें कई बांग्लादेशी नागरिक और म्यांमार के रोहिंग्या शरणार्थी भी शामिल हैं। ये लोग:
- फर्जी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों का उपयोग कर रहे हैं
- मजदूरी, निर्माण कार्य, घरेलू काम और छोटे व्यापारों में शामिल हैं
- कुछ लोग आपराधिक गतिविधियों में भी लिप्त पाए गए हैं
कानूनी कार्रवाई और विशेष बल की तैनाती
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र के निर्देशों के तहत एक विशेष जांच बल (Special Task Force) का गठन किया है, जो राज्य भर में रहने वाले विदेशी नागरिकों के दस्तावेजों की सत्यता की जांच करेगा। इस बल में शामिल हैं:
- पुलिस विभाग के अधिकारी
- राजस्व विभाग के अधिकारी
- खुफिया एजेंसियां
- जिला प्रशासन के प्रतिनिधि
इनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं:
- विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट, वीज़ा और अन्य पहचान पत्रों की जांच
- फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना
- ऐसे विदेशी नागरिकों की पहचान करना जो वीज़ा की अवधि समाप्त होने के बावजूद रह रहे हैं
- गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों को उनके देशों को निर्वासित करना
बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की विशेष निगरानी
तमिलनाडु में विशेष रूप से बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या शरणार्थियों पर निगरानी तेज कर दी गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि:
- कई मामलों में इन लोगों के आतंकवाद से संबंध होने के संदेह हैं
- बड़ी संख्या में एक ही स्थान पर बसने से सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो सकता है
- ये लोग लोकल सरकारी योजनाओं का गलत लाभ उठा सकते हैं
- फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेज बनवाकर कानून व्यवस्था को चुनौती दे सकते हैं
सामाजिक और सुरक्षा पर असर
अवैध विदेशी नागरिकों की मौजूदगी से केवल कानून व्यवस्था ही नहीं, बल्कि समाज की स्थिरता पर भी असर पड़ता है:
- सुरक्षा खतरे – बिना पहचान के देश में रह रहे लोग आतंकवाद या अपराध से जुड़े हो सकते हैं
- रोज़गार पर असर – ये लोग बहुत कम मज़दूरी में काम कर भारतीय कामगारों के लिए अवसर घटा देते हैं
- स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव – सरकारी अस्पतालों में भीड़ बढ़ती है
- शहरी संसाधनों पर बोझ – पानी, बिजली, शिक्षा, परिवहन आदि पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है
केंद्र और राज्य सरकारों की समन्वित कार्रवाई
केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे:
- हर महीने रिपोर्ट सौंपें कि कितने विदेशी नागरिकों की जांच की गई
- जिला मजिस्ट्रेट की देखरेख में दस्तावेजों की वैधता की पुष्टि कराई जाए
- जिनके दस्तावेज फर्जी पाए जाएं, उन्हें निरुद्ध कर निर्वासित किया जाए
- यदि आवश्यक हो तो संबंधित देश के दूतावास से संपर्क कर निर्वासन की प्रक्रिया शुरू की जाए
तमिलनाडु में यह प्रक्रिया प्रशासनिक, कानूनी और राजनयिक स्तरों पर चल रही है।
जनता और संस्थानों की जिम्मेदारी
इस अभियान में केवल सरकार की नहीं, बल्कि सामान्य जनता, मकान मालिकों और नियोक्ताओं की भी जिम्मेदारी है:
- मकान मालिकों को किराए पर घर देने से पहले दस्तावेजों की पुष्टि करनी चाहिए
- कंपनियों और फैक्ट्रियों को अपने कर्मचारियों की पहचान जांचनी चाहिए
- स्कूल और कॉलेजों को विदेशी छात्रों का वीज़ा और पासपोर्ट सत्यापित करना चाहिए
- आम जनता को संदिग्ध गतिविधियों की सूचना स्थानीय पुलिस को देनी चाहिए
कानून और मानवता का संतुलन
हालांकि यह एक सुरक्षा और कानूनी मुद्दा है, लेकिन इसके साथ ही मानवाधिकारों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषकर रोहिंग्या समुदाय, जो म्यांमार में हिंसा और नरसंहार से बचकर आए हैं, उनके साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। इसके लिए:
- संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (UNHCR) की मदद ली जानी चाहिए
- नाबालिगों और महिलाओं के लिए विशेष देखभाल की व्यवस्था होनी चाहिए
- हर मामले की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की जानी चाहिए
निष्कर्ष
तमिलनाडु सहित पूरे भारत में अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान और निष्कासन की प्रक्रिया एक आवश्यक और दीर्घकालीन सुरक्षा उपाय है। यह सुनिश्चित करना कि कोई भी व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत की भूमि पर न रह सके, देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
यह भी उतना ही ज़रूरी है कि इस प्रक्रिया में कानूनी प्रक्रिया, मानवाधिकार, और राजनयिक संतुलन का पालन किया जाए। सरकार, प्रशासन, न्यायालय, और जनता – सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत सुरक्षित, संगठित और समर्पित राष्ट्र बना रहे।