मदुरै हाईकोर्ट बेंच की सख्त टिप्पणी: हिरासत में मारे गए अजीत कुमार के शरीर पर 44 चोट के निशान, पुलिस पर सामूहिक पिटाई का आरोप
तमिलनाडु के सिवगंगई जिले के तिरुप्पुवनम क्षेत्र में एक युवाक अजीत कुमार की पुलिस हिरासत में हुई मौत से जुड़ा मामला मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ में सुनवाई के लिए पेश किया गया। इस दौरान अदालत में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पेश की गई, जिसे देखकर न्यायाधीश स्तब्ध रह गए।
रिपोर्ट के अनुसार, अजीत कुमार के शरीर पर कुल 44 स्थानों पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। यह जानकारी मिलने पर अदालत ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा:
“ऐसा प्रतीत होता है कि अजीत कुमार के शरीर का कोई भी हिस्सा बिना चोट के नहीं बचा। यह एक व्यक्ति विशेष द्वारा की गई मारपीट नहीं, बल्कि सामूहिक रूप से पुलिसकर्मियों द्वारा की गई बर्बरता है।”
न्यायालय के तीखे सवाल
न्यायाधीशों ने इस पर भी कड़ा सवाल उठाया कि पहली सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज किए बिना विशेष जांच दल (SIT) ने यह मामला कैसे अपने हाथ में ले लिया।
“FIR दर्ज किए बिना विशेष टीम को यह केस सौंपना प्रक्रिया के खिलाफ है। यह गंभीर चिंता का विषय है और इससे न्यायिक पारदर्शिता पर सवाल उठता है।”
अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मौत के लिए पुलिसकर्मी जिम्मेदार हैं, और यह एक सामान्य घटना नहीं बल्कि राज्य की मशीनरी द्वारा अपने ही नागरिक की हत्या के समान है।
“यह देखकर दुख होता है कि एक लोकतांत्रिक राज्य अपने ही नागरिक की इस तरह निर्मम हत्या कर सकता है।”
सभी दोषी पुलिस अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश
अदालत ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया कि इस क्रूर कृत्य में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाए। साथ ही तमिलनाडु सरकार को दो दिन के भीतर घटना से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का निर्देश भी दिया गया।
जनता और मानवाधिकार संगठनों में आक्रोश
घटना के सामने आते ही मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों ने तीखी आलोचना की है। कई लोगों ने इसे सथानकुलम के जयराज-बेन्निक्स केस के समान मानते हुए, दोषियों को कठोर दंड देने की मांग की है।
अब जनता यह सवाल पूछ रही है:
“क्या भारत में पुलिस हिरासत वाकई सुरक्षित है?”