एक ही दिन में खुशी और मातम: CSI अस्पताल से NIMS तक की एक सच्ची कहानी

एक ही दिन में खुशी और मातम: CSI अस्पताल से NIMS तक की एक सच्ची कहानी

तारीख: 27 जून 2025
स्थान: मार्तांडम (CSI मिशन अस्पताल) से नेय्यात्रिनकारा (NIMS अस्पताल)

यह दिन एक साधारण सुबह की तरह शुरू हुआ — लेकिन यह एक परिवार के लिए जीवन भर का दर्द छोड़ गया।

सुबह के ठीक 6:30 बजे, मार्तांडम के CSI मिशन अस्पताल में एक महिला ने एक सुंदर कन्या शिशु को जन्म दिया। परिवार के लिए यह अत्यंत हर्ष का क्षण था। अस्पताल की नर्सों ने प्रसन्नता के साथ पिता को यह शुभ समाचार दिया:
“बधाई हो, आपके घर बेटी आई है!”
उन्होंने यह भी बताया कि माँ और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं।

लेकिन यह खुशी एक घंटे के अंदर ही मातम में बदल गई।

करीब 7:30 बजे, अस्पताल की डॉक्टर संगीता बाहर आईं और पति को तुरंत सूचना दी:
“She is very dangerous soon. उसे तुरंत KIMS तिरुवनंतपुरम ले जाइए।”

पति चौंक गया। अभी एक घंटे पहले तो सब कुछ ठीक बताया गया था। इतनी तेजी से क्या बिगड़ गया?

वह तुरंत अंदर जाकर अपनी पत्नी को देखने गए। लेकिन वहाँ जो देखा, उसने उनकी रूह को हिला दिया — उनकी पत्नी बेहोश थी, मुँह जकड़ा हुआ था, कोई प्रतिक्रिया नहीं।

घबराहट के बीच अस्पताल ने ऐम्बुलेंस की व्यवस्था कर दी। लेकिन पति को अब CSI अस्पताल पर संदेह होने लगा। उन्होंने KIMS अस्पताल की जगह, पास के ही नेय्यात्रिनकारा स्थित NIMS अस्पताल में पत्नी को ले जाने का फैसला किया, ताकि समय की बचत हो सके।

जब ऐम्बुलेंस NIMS अस्पताल पहुँची, तो एक डॉक्टर बाहर आए और उन्होंने जो कहा — वह सुनकर जमीन खिसक गई।

“उनकी मृत्यु दो घंटे पहले हो चुकी है।”

पति को विश्वास नहीं हुआ। दो घंटे पहले? यानी लगभग 5:30 या 6:00 बजे?
यह वही समय है जब उन्हें बताया गया था कि बच्ची का जन्म हुआ है और माँ स्वस्थ है।

अब सवाल उठने लगे:

  • क्या CSI अस्पताल ने वास्तविक स्थिति छुपाई?
  • क्या बच्ची के जन्म से पहले ही माँ की मृत्यु हो चुकी थी?
  • अगर मृत्यु पहले ही हो गई थी, तो एक घंटे तक उसे “गंभीर हालत” क्यों कहा गया?
  • क्या जानबूझकर सत्य को रोका गया?

परिवार अब गहरे सदमे में था। एक ओर बेटी का जन्म — दूसरी ओर पत्नी की अंतिम यात्रा। बच्ची ने अपनी माँ का चेहरा तक नहीं देखा।

CSI अस्पताल पर सवाल

अब CSI मिशन अस्पताल के खिलाफ कई सवाल उठने लगे हैं।
डॉ. संगीता, नर्सिंग स्टाफ और प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध हो गई है:

  • क्या मृत्यु की सटीक जानकारी पति को छिपाई गई?
  • क्या मृत्यु प्रमाणपत्र में सही समय दर्ज किया गया है?
  • क्या मृत शरीर का पोस्टमॉर्टम किया गया?
  • पुलिस को सूचना दी गई या नहीं?

अभी तक CSI अस्पताल की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

बच्ची का जन्म — माँ के बिना

इस दुनिया में एक बच्ची ने आँखें खोलीं, लेकिन माँ का साया उसके सिर पर नहीं रहा।
जिस दिन उसे गोदी में लेने वाली पहली आवाज़ माँ की होनी चाहिए थी — वहाँ मातम की चीखें थीं।

समाज के लिए चेतावनी

यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं है — यह हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों का खुला प्रमाण है।
कभी-कभी, अस्पतालों द्वारा जानबूझकर सच्चाई छिपाई जाती है — और परिवार को भ्रम में रखा जाता है।

इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि:

  • मृत्यु के समय की पुष्टि फोरेंसिक जाँच से हो।
  • डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की स्वतंत्र जाँच हो।
  • अगर लापरवाही या सच्चाई छिपाने का प्रमाण मिले, तो कानूनी कार्रवाई की जाए।

निष्कर्ष

एक ऐसा दिन जो खुशियों से भरा होना चाहिए था, वह अचानक अत्यंत पीड़ा का कारण बन गया।

  • पति ने बच्ची के जन्म का जश्न मनाने की कल्पना की थी — लेकिन अब वह पत्नी की लाश लेकर खड़ा था।
  • बच्ची ने जन्म लिया — लेकिन माँ की ममता का अहसास नहीं हो सका।

इस घटना से कई परिवारों को सबक मिलना चाहिए:
“सच्चाई जानने का अधिकार आपका है।”
यदि आपके मन में संदेह हो, तो तुरंत दूसरा मेडिकल ओपिनियन लें। आँख मूँदकर किसी भी अस्पताल या डॉक्टर पर विश्वास न करें।

यह कहानी समाज के लिए एक चेतावनी है — और जिम्मेदारों को न्याय के कठघरे में खड़ा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

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