प्रवर्तन निदेशालय की जांच को राजनीति से न जोड़ें” – भाजपा वरिष्ठ नेता पोन्. राधाकृष्णन

प्रवर्तन निदेशालय की जांच को राजनीति से न जोड़ें” – भाजपा वरिष्ठ नेता पोन्. राधाकृष्णन

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पोन्. राधाकृष्णन ने कहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही जांच को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए। तमिलनाडु के कन्याकुमारी ज़िले के कुलिथुरै में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ED एक स्वतंत्र और वैधानिक अधिकार प्राप्त संस्था है, जो अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन कर रही है।

हाल के दिनों में विपक्षी दलों द्वारा ED की जांचों को राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में पेश किया जा रहा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राधाकृष्णन ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए कि जांच राजनीति से जुड़ी है, इसका मतलब यह नहीं कि वह राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है। उन्होंने कहा, “प्रवर्तन निदेशालय एक स्वतंत्र संस्था है जिसे विशेष अधिकार प्राप्त हैं। इसकी वैधता पर सवाल उठाना, हमारे न्यायिक तंत्र पर सवाल उठाने के बराबर है।”

उन्होंने TASMAC (तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन) के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि भले ही अदालत ने कुछ मामलों में अस्थायी रोक लगाई हो, कानून को अपना कार्य करने से नहीं रोका जा सकता। “न्याय प्रक्रिया को बाधित करना लोकतंत्र और कानून के शासन के खिलाफ है,” उन्होंने कहा।

इसके साथ ही उन्होंने भारत की सैन्य ताकत और सैनिकों के बलिदान की सराहना करते हुए कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश की सुरक्षा का भार हमारे जवानों के कंधों पर है। “वे आतंकवाद और विदेशी आक्रमणों से देश की रक्षा करते हैं। उनके बलिदान की कोई बराबरी नहीं हो सकती,” उन्होंने भावुक होकर कहा।

उन्होंने आगे कहा कि जो लोग सेना के खिलाफ बयान देते हैं, वे उन लोगों के समान हैं जो अपनी ही मां का अपमान करते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें न तो देश की रक्षा करने वालों की अहमियत का एहसास है, न ही देशभक्ति का।

पोन्. राधाकृष्णन ने अपने वक्तव्य में यह स्पष्ट किया कि न्यायपालिका, प्रवर्तन निदेशालय और सशस्त्र बल जैसी संस्थाएं भारत के लोकतंत्र की रीढ़ हैं। इन पर सवाल उठाना या उन्हें बदनाम करना, देश को भीतर से कमजोर करने जैसा है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और आम जनता से अपील की कि वे ऐसी संस्थाओं का सम्मान करें और उन्हें अपने राजनीतिक एजेंडे में शामिल न करें।

निष्कर्ष:
पोन्. राधाकृष्णन का यह वक्तव्य एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत की कानूनी और रक्षा संस्थाओं को राजनीतिक रंग देना अनुचित है। इन संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखना ही लोकतंत्र की सच्ची रक्षा है।

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