इंग्लैंड टेस्ट सीरीज़ के लिए भारतीय टीम से करुण नायर बाहर

इंग्लैंड टेस्ट सीरीज़ के लिए भारतीय टीम से करुण नायर बाहर

मुंबई
भारतीय क्रिकेट टीम अगले महीने (जून) इंग्लैंड दौरे पर जा रही है, जहां वह पांच टेस्ट मैचों की सीरीज़ खेलेगी। इस सीरीज़ का पहला टेस्ट 20 जून को लीड्स के हेडिंग्ले स्टेडियम में शुरू होगा। इस प्रतिष्ठित दौरे के लिए 18 सदस्यीय भारतीय टेस्ट टीम की घोषणा कल मुंबई में चयन समिति के अध्यक्ष अजीत आगरकर की अगुवाई में की गई।

इस टीम चयन में सबसे चौंकाने वाला निर्णय यह रहा कि करुण नायर, जो आठ साल बाद घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर टीम में लौटे थे, उन्हें अब टीम से बाहर कर दिया गया है। दूसरी ओर, ऑलराउंडर शार्दुल ठाकुर को टीम में दोबारा शामिल किया गया है। तेज़ गेंदबाज़ हर्षित राणा और बल्लेबाज़ सरफराज़ खान, जो हाल ही में ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ का हिस्सा थे, उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया है।

इनमें से सरफराज़ खान को बाहर किए जाने से फैन्स और क्रिकेट विशेषज्ञों में नाराज़गी देखने को मिल रही है। घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने वाले सरफराज़ ने इंग्लैंड के खिलाफ अपने डेब्यू टेस्ट में बेहतरीन अर्धशतक लगाए थे। इसके अलावा उन्होंने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ भी शतक जमाकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। इतनी अच्छी फॉर्म और प्रदर्शन के बावजूद उन्हें टीम से हटाना कई लोगों को अनुचित लग रहा है, खासकर जब करुण नायर को उनकी जगह लिया गया है।

इस फैसले के पीछे की वजह को लेकर चयन समिति प्रमुख अजीत आगरकर ने सफाई दी। उन्होंने कहा:

“कुछ फैसले किसी के लिए न्यायपूर्ण लग सकते हैं और किसी के लिए अन्यायपूर्ण। इस समय करुण नायर ने घरेलू क्रिकेट में काफी रन बनाए हैं। इसके अलावा उन्होंने इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट भी खेला है, जिससे उन्हें वहां की परिस्थितियों का अनुभव है। कभी-कभी हमें मुश्किल फैसले लेने पड़ते हैं।

सरफराज़ खान ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में शतक ज़रूर लगाया था, लेकिन उसके बाद वह रन बनाने में असफल रहे।

विराट कोहली की गैरमौजूदगी में मौजूदा टीम में अनुभव की कमी है। ऐसे में हमें लगा कि करुण नायर का अनुभव इंग्लैंड की परिस्थितियों में टीम के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।”

आगरकर की इस सफाई से यह स्पष्ट होता है कि चयन समिति ने अनुभव और हालिया फॉर्म को प्राथमिकता दी है। भले ही सरफराज़ के फैन्स निराश हों, लेकिन टीम मैनेजमेंट ने संतुलन बनाए रखने के लिए अनुभवी विकल्प को तरजीह दी है।

अब देखना यह होगा कि इंग्लैंड की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में चयनकर्ताओं का यह निर्णय सही साबित होता है या नहीं। सभी की निगाहें टीम के प्रदर्शन और इन चयन विवादों पर रहेंगी।

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