एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत की धमाकेदार प्रदर्शन: एक दिन में तीन स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास

एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत की धमाकेदार प्रदर्शन: एक दिन में तीन स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास

दक्षिण कोरिया के गुमी शहर में चल रही 26वीं एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत ने तीसरे दिन ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। भारतीय खिलाड़ियों ने एक ही दिन में तीन स्वर्ण पदक जीतकर न सिर्फ देश का मान बढ़ाया बल्कि यह भी साबित कर दिया कि भारत अब एशिया में एथलेटिक्स की एक मजबूत शक्ति बन चुका है। इस प्रतियोगिता में 43 देशों के 2000 से अधिक एथलीट हिस्सा ले रहे हैं।


3000 मीटर स्टीपलचेज़ में अविनाश साबले का स्वर्णिम पल

तीसरे दिन की शुरुआत भारतीय धावक अविनाश साबले की जबरदस्त जीत के साथ हुई। उन्होंने पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज़ स्पर्धा में 8 मिनट 20.92 सेकंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

जापान के युटारो निनाई ने 8:24.41 सेकंड के साथ रजत पदक और कतर के जकारिया एलक्लामी ने 8:27.12 सेकंड के साथ कांस्य पदक जीता।

30 वर्षीय महाराष्ट्र के रहने वाले अविनाश का यह दूसरा एशियाई चैंपियनशिप पदक है। 2019 में उन्होंने रजत पदक जीता था। इसके साथ ही वह 1989 के बाद पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता है। उनका फिनिश बेहद रोमांचक रहा, जिसमें उन्होंने अंतिम क्षणों में अपने प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की।


महिलाओं की 100 मीटर बाधा दौड़ में ज्योति यर्राजी का दबदबा

भारत की ज्योति यर्राजी ने महिलाओं की 100 मीटर बाधा दौड़ (हर्डल्स) में शानदार प्रदर्शन करते हुए 12.96 सेकंड में दौड़ पूरी की और स्वर्ण पदक जीता। यह न सिर्फ उनका लगातार दूसरा एशियाई चैंपियनशिप स्वर्ण था, बल्कि उन्होंने नई प्रतिस्पर्धा रिकॉर्ड भी बनाया।

आंध्र प्रदेश की रहने वाली 25 वर्षीय ज्योति ने जापान की युमी तनाका (13.06 सेकंड) और चीन की वू यानि (13.06 सेकंड) को पछाड़ा। यह जीत उनके लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण है और उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह एशिया की सबसे बेहतरीन महिला हर्डल धावकों में से एक हैं।


महिला 4×400 मीटर रिले में भारत को तीसरा स्वर्ण

भारतीय महिला टीम ने 4×400 मीटर रिले दौड़ में 3 मिनट 34.18 सेकंड का समय लेकर स्वर्ण पदक जीत लिया। इस टीम में जिस्ना मैथ्यू, रूपल चौधरी, कुंजा रजिता और सुभा वेंकटेशन शामिल थीं।

तमिलनाडु की सुभा वेंकटेशन पहले भी मिक्स्ड रिले में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। इस दौड़ में भारत की शुरुआत अच्छी रही और अंत तक भारतीय धाविकाएं बढ़त बनाए रखने में सफल रहीं। यह भारत का चैंपियनशिप में 5वां स्वर्ण पदक और तीसरे दिन का तीसरा स्वर्ण था।


पुरुष 4×400 मीटर रिले में भारत को रजत पदक

पुरुषों की 4×400 मीटर रिले में भारत की टीम ने 3 मिनट 03.67 सेकंड में दौड़ पूरी कर रजत पदक जीता। टीम में जयकुमार, धर्मवीर चौधरी, मनु साजी और विशाल शामिल थे। इस स्पर्धा में कतर की टीम ने 3:03.52 सेकंड में दौड़ पूरी कर स्वर्ण जीता।

हालांकि भारत स्वर्ण से थोड़े अंतर से चूक गया, लेकिन यह प्रदर्शन भी शानदार रहा। रिले रेस में टीमवर्क और सामंजस्य की भूमिका अहम होती है, और भारतीय टीम ने इसे बखूबी दिखाया।


महिला लंबी कूद में दो भारतीय पदक विजेता

महिलाओं की लॉन्ग जंप (लंबी कूद) स्पर्धा में भी भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। आंसी सोजन ने 6.33 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता, जबकि शैली सिंह ने 6.30 मीटर के साथ कांस्य पदक हासिल किया। ईरान की रेहानेह मोबिनी अरानी ने 6.40 मीटर की छलांग के साथ स्वर्ण पदक जीता।

इसमें खास बात यह रही कि भारत की दोनों खिलाड़ी बेहद युवा हैं और भविष्य में इनसे बहुत उम्मीद की जा सकती है।


भारत की सफलता का व्यापक महत्व

एक ही दिन में 3 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य पदक जीतना किसी भी देश के लिए गर्व की बात होती है। भारत की यह उपलब्धि न सिर्फ खिलाड़ियों की मेहनत का नतीजा है, बल्कि यह खेल मंत्रालय, कोचिंग स्टाफ और स्पोर्ट्स साइंस टीमों के समर्पण को भी दर्शाती है।

इस प्रदर्शन से यह भी साबित हुआ कि भारत अब सिर्फ क्रिकेट का देश नहीं रहा, बल्कि एथलेटिक्स जैसे कठिन खेलों में भी विश्व स्तर पर पहचान बना रहा है। देश के कोने-कोने से प्रतिभाएं निकलकर आ रही हैं—महाराष्ट्र से लेकर आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु तक, हर राज्य से खिलाड़ी भारत का परचम लहरा रहे हैं।


भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा

अविनाश साबले, ज्योति यर्राजी और सुभा वेंकटेशन जैसे खिलाड़ी आज युवाओं के लिए रोल मॉडल बन चुके हैं। इनकी सफलता से देश के दूर-दराज इलाकों में बैठे हजारों बच्चे और किशोर यह समझ पा रहे हैं कि वे भी यदि मेहनत करें तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

यह प्रदर्शन आने वाले एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और ओलंपिक के लिए भी भारत की तैयारियों को मजबूत करता है। अब आवश्यकता है निरंतर प्रशिक्षण, संसाधनों की आपूर्ति और मानसिक समर्थन की।


निष्कर्ष

गुमी शहर में चल रही एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप का तीसरा दिन भारत के लिए स्वर्णिम दिन साबित हुआ। एक ही दिन में तीन स्वर्ण जीतना भारतीय खेल इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया है।

इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि भारतीय एथलीट अब सिर्फ प्रतिस्पर्धा में भाग लेने नहीं, बल्कि विजय का झंडा फहराने के लिए मैदान में उतरते हैं। अब दुनिया भारत को एथलेटिक्स में भी एक प्रतिद्वंदी शक्ति के रूप में देखेगी।

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