ऑपरेशन सिंधूर का प्रभाव: पाकिस्तान में शेयर बाजार बंद
मई 2025 में, जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में भारतीय सुरक्षा बलों पर हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव गंभीर रूप से बढ़ गया। इस हमले को पाकिस्तान-आकृषित कश्मीर (PoK) में सक्रिय आतंकी समूहों द्वारा अंजाम दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय सशस्त्र बलों ने त्वरित और रणनीतिक प्रतिक्रिया दी। इसके तहत भारत ने पाकिस्तान-आकृषित कश्मीर में स्थित आतंकी शिविरों को निशाना बनाते हुए “ऑपरेशन सिंधूर” नामक एक सटीक सैन्य अभियान शुरू किया।
ऑपरेशन सिंधूर के तहत किए गए हमलों ने एक स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब सीमा पार आतंकवाद को सहन नहीं करेगा और जब भी जरूरत पड़ी, वह जवाबी कार्रवाई करेगा। यह सैन्य कार्रवाई सफल रही और कई आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया, लेकिन इसका प्रभाव केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा — बल्कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तक भी इसका प्रभाव पड़ा।
जैसे ही हमले की खबर फैल गई, पाकिस्तान के वित्तीय बाजारों में घबराहट फैल गई। निवेशक, जो सुरक्षा और असुरक्षा के माहौल से डर गए थे, एक साथ अपने निवेश को बेचने लगे। इसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में अचानक और तेज गिरावट आई। बैंकिंग, ऊर्जा और अवसंरचना जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारी बिकवाली हुई, जिससे बाजार सूचकांक एक ही दिन में 6% से 10% तक गिर गए।
इस गिरावट ने विश्वास संकट को जन्म दिया। कई विदेशी निवेशक, जो पहले ही पाकिस्तान की बढ़ती महंगाई और आर्थिक चुनौतियों से चिंतित थे, सुरक्षा स्थिति को एक निर्णायक बिंदु के रूप में देख रहे थे। इसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान के शेयर बाजार को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया — यह एक दुर्लभ और गंभीर कदम था जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता था।
पाकिस्तान के प्रमुख वित्तीय संस्थान भारी नुकसान का सामना कर रहे थे, और बैंकिंग क्षेत्र को इस निवेशकों की भागने की स्थिति का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ा। इस बीच, अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने पाकिस्तान के आर्थिक दृष्टिकोण का पुनर्मूल्यांकन करना शुरू कर दिया और इस बात को लेकर चिंता व्यक्त की कि देश उथल-पुथल के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में सक्षम है या नहीं।
शेयर बाजार का बंद होना केवल एक आर्थिक घटना नहीं थी, बल्कि यह पाकिस्तान की मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति में उसकी नाजुकता का प्रतीक बन गया। जबकि पाकिस्तान की राजनीतिक नेतृत्व ने ऑपरेशन सिंधूर को आक्रामकता का कृत्य करार दिया, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ काफी हद तक नकारात्मक नहीं थीं और अधिकांश देशों ने भारत की कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ लक्षित प्रतिक्रिया के रूप में देखा।
अंत में, ऑपरेशन सिंधूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि पाकिस्तान में एक वित्तीय हलचल का कारण बना, जिससे यह साफ हो गया कि भू-राजनीतिक दबाव के तहत एक देश की अर्थव्यवस्था कितनी संवेदनशील हो सकती है। पाकिस्तान के लिए यह एक कठोर याद दिलाने जैसा था कि अस्थिरता को बढ़ावा देने का आर्थिक मूल्य और आतंकवादी समूहों को अपने अंदर पनाह देने के परिणामस्वरूप क्या हो सकता है।